मध्य प्रदेश

अवैध कब्जों पर सख्ती: उज्जैन में जमीन खाली कराने का फरमान

सिंहस्थ से पहले उज्जैन के तालाबों पर NGT सख्त। सप्तसागर सहित जल स्रोतों में अतिक्रमण और सीवेज पर नाराजगी, मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश।

उज्जैन. आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सरकार जहां उज्जैन में शिप्रा नदी सहित सभी जल स्रोतों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सप्तसागर सहित अन्य तालाबों से न तो बीते दो वर्षों में अतिक्रमण हट सका और न ही उनमें सीवेज का प्रवाह रोका जा सका। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ी नाराजगी जताई है।

नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर पर NGT की सख्त टिप्पणी

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि उज्जैन नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों का न तो समुचित पालन किया गया और न ही प्रगति से संबंधित हलफनामा समय पर प्रस्तुत किया गया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि निर्देशों के अनुपालन में प्रतिबद्धता और ईमानदारी की कमी को वह हल्के में नहीं लेगा।

मुख्य सचिव को दिए सख्त निर्देश, दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब

ट्रिब्यूनल ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को तालाबों से अतिक्रमण हटाने तथा जल गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करने को कहा गया है। एनजीटी ने शासन से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को निर्धारित की गई है।

36 बीघा में दर्ज तालाब, 18 बीघा पर अतिक्रमण

सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। याचिकाओं में उल्लेख किया गया कि उज्जैन जिले के सप्तसरोवर–रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर का धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, गोवर्धन सागर खसरा नंबर 1281 में कुल 36 बीघा भूमि पर दर्ज है, जिसमें से 18 बीघा भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है।

NGT की समिति ने की थी पुष्टि

एनजीटी के अगस्त 2024 के आदेश के तहत गठित समिति ने जांच में तालाबों में अतिक्रमण और सीवेज मिलने की पुष्टि की थी। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई न होने पर ट्रिब्यूनल ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है।

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