सांसदों का आरोप—दिल्ली की हवा जहरीली, लोकसभा में प्रदूषण पर हंगामा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर लोकसभा में गुरुवार को जोरदार चर्चा हुई।

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर लोकसभा में गुरुवार को जोरदार चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने दावा किया कि राजधानी में स्वच्छ दिनों (AQI 200 से कम) की संख्या में सुधार हुआ है, जबकि विपक्ष ने इसे “बहाना” बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को तुरंत ठोस कदम उठाने की नसीहत दी।
केंद्र का दावा: 2016 के मुकाबले दोगुने हुए स्वच्छ दिन
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि—
- 2016 में दिल्ली में 110 स्वच्छ दिन दर्ज किए गए थे,
- जबकि 2025 में अब तक ऐसे 200 स्वच्छ दिन दर्ज किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जनवरी–नवंबर अवधि के दौरान दिल्ली का औसत AQI 187 रहा, जबकि 2018 में यह 213 था।
यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि 2025 में एक भी दिन AQI “अत्यधिक गंभीर” (450 से अधिक) स्तर तक नहीं पहुंचा।
प्रदूषण नियंत्रण पर 6 समीक्षा बैठकें
भूपेंद्र यादव ने बताया कि वायु प्रदूषण रोकने के लिए कृषि मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय और अन्य विभागों के साथ छह समीक्षा बैठकें की गई हैं। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन से लेकर सड़क धूल नियंत्रण और औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी तक कई कदम उठाए गए हैं।
विपक्ष का पलटवार: “बहाने बंद करें, ठोस कदम उठाएं”
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा— “दिल्ली में लोग प्रदूषण के कारण सांस नहीं ले पा रहे हैं। सरकारें केवल बहाना बना रही हैं और AQI नंबरों को मैनेज कर रही हैं।” उन्होंने मांग की कि सरकार चीन की राजधानी बीजिंग की तरह एक ठोस और दीर्घकालिक योजना लागू करे।
संसद को दिल्ली से बाहर ले जाने का सुझाव
बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद मानस रंजन मंगराज ने वायु प्रदूषण को “मनुष्य द्वारा पैदा की गई आपदा” बताते हुए सुझाव दिया कि— “जब तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो जाता, तब तक संसद के शीतकालीन और बजट सत्र राजधानी से बाहर आयोजित किए जाएं।”
उन्होंने भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून जैसे स्वच्छ वायु वाले शहरों को संसद सत्र के लिए विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया।




