मध्य प्रदेश

21 करोड़ रोज, नतीजा शून्य? MP हाईवे पर हर दिन 33 दुर्घटनाएं, 10 लोगों की मौत

MP Highway Accident Report: मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोज़ ₹21 करोड़ खर्च के बावजूद हर दिन 33 हादसे और 10–11 मौतें, लोकसभा में पेश आंकड़ों ने उठाए सवाल।

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। Lok Sabha में Ministry of Road Transport and Highways की ओर से पेश ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन ₹21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोज़ाना औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में प्रतिदिन 10 से 11 लोगों की जान जा रही है।

पांच साल में ₹38,700 करोड़ खर्च, फिर भी सुरक्षा सवालों के घेरे में

सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए कुल ₹38,700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन ₹7,740 करोड़ हाईवे चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद सुरक्षित यात्रा की गारंटी नहीं मिल पा रही है।

हर साल 12 हजार से ज्यादा हादसे, करीब 4 हजार मौतें

लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश में कुल 61,176 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
इन हादसों में 19,416 लोगों की मौत हुई।

  • औसतन हर साल: 12,235 हादसे
  • सालाना औसत मौतें: 3,883
  • ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हाईवे आम लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।

साल-दर-साल खर्च का ब्योरा (करोड़ रुपये में)

वर्ष हाईवे डेवलपमेंट व मेंटेनेंस खर्च
2020–21 8,250
2021–22 9,006
2022–23 6,210
2023–24 7,447
2024–25 7,799
कुल 38,700

राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025)

साल कुल हादसे कुल मौतें
2021 11,030 3,389
2022 13,860 4,025
2023 14,561 4,476
2024 13,937 4,644
2025 7,788 2,882
कुल 61,176 19,416

हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां?

केंद्र सरकार के अनुसार, यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत, सुरक्षा उपायों और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच वर्षों में मध्य प्रदेश को 4,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाईवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं, जितने कागजों में दिखते हैं।

सरकार ने गिनाईं वजहें, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

लोकसभा में दिए गए जवाब में मंत्रालय ने दुर्घटनाओं के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग और सड़क-वाहन की स्थिति को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी तंत्र पर खर्च की प्रभावी मॉनिटरिंग के बिना हादसों में कमी लाना मुश्किल है।

निष्कर्ष: निवेश भारी, लेकिन नतीजे कमजोर

सरकार का दावा है कि बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा और मेंटेनेंस पर खर्च किया गया है, लेकिन आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग अब भी डेथ ट्रैप बने हुए हैं। सवाल यही है—क्या करोड़ों का निवेश सही दिशा में और सही गुणवत्ता के साथ हो रहा है?

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