मध्य प्रदेश

सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग विवाद, हाईकोर्ट ने दी 48 घंटे की मोहलत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो के दुरुपयोग पर सख्ती दिखाते हुए सोशल मीडिया से 102 आपत्तिजनक लिंक 48 घंटे में हटाने के आदेश दिए। अगली सुनवाई 24 मार्च को।

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की अदालतों में चल रही सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो के सोशल मीडिया पर दुरुपयोग को चुनौती देते हुए दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने 102 विवादित यूआरएल को 48 घंटे के भीतर हटाने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को तय की गई है।

क्या है पूरा मामला

जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी, विदित शाह और डॉ. विजय बजाज की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो को काट-छांट कर, मीम्स और सनसनीखेज शॉर्ट्स के रूप में यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर प्रसारित किया जा रहा है। इससे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा प्रभावित हो रही है।

न्यायिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ओपन कोर्ट में न्यायाधीशों द्वारा कही गई बातों को संदर्भ से हटाकर, मिर्च-मसाला लगाकर वायरल किया जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। अदालती कार्यवाही की चयनात्मक क्लिपिंग और सनसनीखेज प्रस्तुति न्यायिक अनुशासन के लिए गंभीर खतरा है।

लाइव स्ट्रीमिंग नियमों का हवाला

याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग एवं रिकॉर्डिंग नियम 11(बी) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि: अदालत की लाइव-स्ट्रीम सामग्री को किसी भी रूप में संपादित, छेड़छाड़ या अवैध उपयोग नहीं किया जा सकता। पूर्व में भी हाईकोर्ट ऐसे कृत्यों पर रोक लगा चुका है।

यूट्यूब की जगह सुरक्षित प्लेटफॉर्म की मांग

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की कि:

  • यूट्यूब के बजाय वेबेक्स आधारित सुरक्षित प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग की जाए।
  • रजिस्ट्रार (आईटी) को इस तरह की गतिविधियों पर नियमित मॉनिटरिंग और नियंत्रण के निर्देश दिए जाएं।

मेटा कंपनी का पक्ष

सुनवाई के दौरान मेटा कंपनी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यदि आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं, तो उन्हें हटाया जा सकता है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने 102 विवादित यूआरएल की सूची कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की।

कोर्ट का सख्त आदेश

याचिका पर सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सभी 102 आपत्तिजनक लिंक को 48 घंटे में हटाने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने साफ कहा कि पारदर्शिता के नाम पर न्यायालय की गरिमा और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

पहले भी लग चुकी है रोक

इससे पहले हाईकोर्ट क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगा चुका है। कोर्ट का स्पष्ट मत है कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा सर्वोपरि है।

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