‘आप कहें और हम…’ पर विराम: कलकत्ता HC ने BJP नेता की याचिका खारिज की
लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अफरा-तफरी पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI जांच से इनकार किया। कोर्ट ने कहा—मौजूदा स्तर पर दखल का कोई आधार नहीं।
कोलकाता. कलकत्ता हाई कोर्ट ने फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के दौरे के दौरान 13 दिसंबर को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अफरा-तफरी की घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है।
सोमवार (22 दिसंबर) को हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और पूर्व हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में चल रही जांच अभी शुरुआती चरण में है। कोर्ट के अनुसार, ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि जांच या पूछताछ में कोई गड़बड़ी हो रही है।
‘इस स्तर पर दखल देना उचित नहीं’
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इसलिए, इस स्टेज पर हम इस मामले में दखल देने और जांच या पूछताछ पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा।
CBI जांच की मांग वाली PIL पर झटका
यह मामला तीन जनहित याचिकाओं (PIL) के जरिए अदालत के समक्ष लाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने CBI जांच के साथ-साथ दर्शकों को टिकट के पैसे वापस कराने की भी मांग की थी। इन याचिकाकर्ताओं में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हैं। अदालत ने अंतरिम राहत की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर जांच पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।
‘सिर्फ आरोपों के आधार पर CBI जांच नहीं’
सुनवाई के दौरान पीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा, “सिर्फ याचिकाकर्ताओं के कहने पर या केवल आरोप लगाए जाने के आधार पर जांच को CBI या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता।”
कोर्ट ने राज्य सरकार और कार्यक्रम के आयोजक को चार सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं याचिकाकर्ताओं को उसके बाद दो सप्ताह में जवाब देने की अनुमति दी गई है।
डीजीपी को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
पीठ ने बताया कि तीनों जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की गई है और इस पर 16 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में दोबारा सुनवाई होगी। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि टिकटों की बिक्री सरकार द्वारा नहीं की गई थी और यह एक निजी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी का कार्यक्रम था। सरकार ने यह भी बताया कि SIT पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कार्यक्रम आयोजक पहले ही गिरफ्तार
इस गड़बड़ी के सिलसिले में कार्यक्रम प्रबंधन कंपनी के मालिक सताद्रु दत्ता को 14 दिसंबर को, यानी कार्यक्रम के अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।
शुभेंदु अधिकारी के वकील बिलवादल भट्टाचार्य ने कार्यक्रम के लिए धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए किसी सक्षम केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने जताया था खेद
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि ममता बनर्जी ने घटना के तुरंत बाद खेद व्यक्त किया था। इसके बाद सरकार ने एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की समिति गठित की।
गौरतलब है कि अपने पसंदीदा खिलाड़ी लियोनेल मेसी को न देख पाने से नाराज दर्शकों के एक वर्ग ने उपद्रव शुरू कर दिया था। मैदान पर अव्यवस्था और मेसी के आसपास धक्का-मुक्की की स्थिति बनने के कारण कार्यक्रम को समय से पहले समाप्त करना पड़ा, जिससे स्टैंड में बैठे दर्शक और अधिक नाराज हो गए।




