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मांडू: अफ़गान वास्तुकला से भरी वो दुनिया, जो आज भी सांस लेती है

मांडू, मांडवगढ़ या शादियाबाद—पुराने जमाने की खुशियों की भूमि—ने समय और प्रकृति के अनेक प्रकोपों को सहा है। आज यह पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का एक प्रमुख आकर्षण है।

मांडू, मांडवगढ़ या शादियाबाद—पुराने जमाने की खुशियों की भूमि—ने समय और प्रकृति के अनेक प्रकोपों को सहा है। आज यह पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का एक प्रमुख आकर्षण है। मालवा की पारंपरिक दाल, दाल-बाटी, मालपुआ और अन्य व्यंजनों के साथ मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित मालवा उत्सव पर्यटकों को यहां आने का शानदार अवसर प्रदान करता है।

मांडू और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थल

मांडू का इतिहास जितना पुराना है, इसकी वास्तुकला उतनी ही अद्भुत। यहां के विशाल दरवाजे, मस्जिदें, महल, किलों के प्रवेश द्वार और स्मारक इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

सबसे उल्लेखनीय स्थलों में से एक होसांग शाह का मकबरा है, जिसे भारत की पहली संगमरमर संरचना माना जाता है। कहा जाता है कि ताजमहल के निर्माण के लिए इसी मकबरे से प्रेरणा ली गई थी। यह मकबरा मांडू पर्यटन की सैर का एक महत्वपूर्ण और विनम्र हिस्सा है।

इतिहास के पन्नों में मांडू

मांडू के सफल शासकों की पहचान उनकी निर्मित भव्य इमारतों और स्मारकों से होती है, जो आज भी यहां गर्व से खड़े हैं।
अफगान शासक दिलावर खान ने इस छोटे से राज्य पर शासन किया था। उनके पुत्र होसांग शाह ने मांडू को एक छोटे राज्य से एक समृद्ध और चमकदार नगर में बदल दिया।

बाद में अकबर के नेतृत्व में बाज बहादुर को हटाए जाने के बाद मांडू गुमल साम्राज्य का हिस्सा बन गया। वर्ष 1732 में मराठों ने इस क्षेत्र पर विजय प्राप्त की, जिसके बाद मांडू का इतिहास एक नए दौर में प्रवेश करता है।

मांडू तक कैसे पहुंचे?

मांडू तक पहुंचने के लिए एयर, रेल और सड़क—तीनों साधन उपलब्ध हैं।

  • निकटतम एयरपोर्ट: इंदौर
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: रतलाम/इंदौर
  • सड़क मार्ग: इंदौर, धार और आसपास के शहरों से नियमित बस/कार सुविधा

मांडू घूमने का सबसे अच्छा मौसम

मानसून के दौरान मांडू का मौसम सबसे सुहाना होता है। हल्की फुहारें, हरी-भरी वादियां और रोमांचक बादलों का खेल इस स्थान की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए इस मौसम में यहां छुट्टियां बिताना एक बेहतरीन अनुभव साबित होता है।

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