कल से माघ गुप्त नवरात्रि— साधना और सिद्धि का विशेष पर्व
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 जनवरी से। जानें घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, गुप्त नवरात्रि का महत्व और पूजा विधि, जिससे साधना हो सफल।

नई दिल्ली. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शक्ति की साधना के बिना अन्य देवी-देवताओं की पूजा को भी अधूरा माना जाता है। वर्ष में नवरात्रि चार बार आती है—शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अलावा दो बार गुप्त नवरात्रि का आयोजन होता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि जहां सार्वजनिक रूप से नौ दिनों तक मनाई जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी साधना गुप्त और व्यक्तिगत रूप से की जाती है।
माघ गुप्त नवरात्रि कब से कब तक
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से होगी और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। इस दौरान साधक विशेष रूप से देवी शक्ति की उपासना करते हैं।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
- घट स्थापना मुहूर्त: सुबह 6:43 बजे से 10:24 बजे तक (19 जनवरी)
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से 12:36 बजे तक
- इन मुहूर्तों में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
माघ गुप्त नवरात्रि का संबंध दस महाविद्याओं की साधना से माना जाता है। यह नवरात्रि शीत ऋतु के दौरान, बसंत ऋतु के आगमन से पहले आती है और तंत्र-मंत्र व गुप्त सिद्धियों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि इस नवरात्रि में साधना जितनी गुप्त रखी जाए, उसका फल उतना ही प्रभावशाली होता है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थल की साफ-सफाई करें
- मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं
- फूल और अक्षत अर्पित करें
- मां दुर्गा के मंत्रों का मन ही मन जाप करें
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है
- अंत में आरती करें और किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करते हुए मां का आशीर्वाद लें




