लोयांग: चीन के देवताओं की नगरी, जहाँ इतिहास और आस्था मिलते हैं
लोयांग चीन की प्राचीन राजधानियों में से एक है, जो 13 राजवंशों की राजधानी रहा। लुंगमेन गुफाएं, पईमा मंदिर और चंद्रपुष्प मेले के लिए प्रसिद्ध यह शहर चीनी सभ्यता की आत्मा को दर्शाता है।
चीन में यह प्रचलित है कि यदि आप देश के उत्थान और पतन की दास्तान को करीब से समझना चाहते हैं, तो एक बार लोयांग का रुख जरूर कीजिए। हनान प्रांत के पश्चिमी हिस्से में और पीली नदी के दक्षिणी तट पर बसा यह शहर ईसा पूर्व 12वीं सदी में स्थापित हुआ था। लोयांग चीन की आठ प्राचीन राजधानियों में से एक है और इतिहास के लंबे कालखंड तक सत्ता का केंद्र रहा है।
देवताओं की राजधानी, 13 राजवंशों का गौरव
चीनी इतिहास में लोयांग इकलौता शहर है जिसे ‘देवताओं की राजधानी’ कहा गया। यह शहर 13 राजवंशों की राजधानी रहा और लगभग 1500 वर्षों तक राजधानी होने का गौरव प्राप्त किया। लोयांग को चीनी सभ्यता के प्रमुख जन्मस्थलों में गिना जाता है, जहां दर्शन, संस्कृति और प्रशासनिक परंपराओं ने आकार लिया।
पर्यटन का खजाना, हर कदम पर इतिहास
आज लोयांग चीन के शीर्ष पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां के प्राचीन राजधानी अवशेष, मंदिर, गुफाएं और मकबरे इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं। उल्लेखनीय है कि चाइना रेडियो इंटरनेशनल (CRI) की हिंदी सेवा द्वारा चीन के आकर्षक शहरों को चुनने के लिए आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता में लोयांग भी शामिल है, जिसमें दुनिया भर के नेटिजन ऑनलाइन मतदान में हिस्सा ले रहे हैं।
लुंगमेन गुफाएं: बौद्ध कला की उत्कृष्ट मिसाल
लोयांग की धरोहरों में लुंगमेन गुफाएं सबसे खास मानी जाती हैं। पहले इन्हें यी नदी का द्वार कहा जाता था, बाद में ‘लुंगमेन’ यानी ‘ड्रैगन गेट’ के नाम से पहचान मिली। इन बौद्ध गुफाओं पर काम उस समय शुरू हुआ, जब उत्तरी वेइ राजवंश के सम्राट ने दातोंग की जगह लोयांग को राजधानी बनाया। यहां सात राजवंशों के काल तक कारीगरी चलती रही। लुंगमेन में 1300 से अधिक गुफाएं, 40 छोटे पगोड़ा और करीब एक लाख बौद्ध प्रतिमाएं हैं, जिनकी ऊंचाई एक इंच से लेकर 57 फुट तक है। इसे चीन में बौद्ध संस्कृति की उत्कृष्ट धरोहर माना जाता है।
पईमा मंदिर: चीन का पहला सरकारी बौद्ध मठ
लोयांग में स्थित पईमा मंदिर चीन का पहला सरकारी बौद्ध मठ है। बौद्ध धर्म के आधिकारिक रूप से प्रवेश के बाद इसका निर्माण हुआ था और आज भी यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।
चंद्रपुष्पों का साम्राज्य
लोयांग को ‘पुष्पों का साम्राज्य’ भी कहा जाता है। यहां रंग-बिरंगे पीयोनी या चंद्रपुष्प खिलते हैं, जिन्हें शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हर साल 15 अप्रैल से 8 मई के बीच, जब चंद्रपुष्प पूरे यौवन पर होते हैं, तब शहर में भव्य चंद्रपुष्प मेले का आयोजन किया जाता है।
रेशम मार्ग से जुड़ा ऐतिहासिक शहर
इतिहास के पन्नों में दर्ज विश्वप्रसिद्ध रेशम मार्ग भी लोयांग से होकर गुजरता था। इस मार्ग ने लोयांग को व्यापार, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया।




