बंगाल में निपाह वायरस का खतरा बढ़ा, 2 मरीज भर्ती; CS ने जारी किए निर्देश
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस की आशंका, दो नर्सें अस्पताल में भर्ती। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू, SOP लागू, हेल्पलाइन नंबर जारी। डॉक्टर संगठनों ने प्रशासन की तैयारी पर उठाए सवाल।

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर निपाह वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। वायरस से संक्रमित होने के बाद दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों पीड़ितों को बारासात के एक निजी अस्पताल में एडमिट किया गया है और एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है। जानकारी के अनुसार, दोनों संक्रमित पेशे से नर्स हैं।
22 से 25 वर्ष की उम्र, पहचान गोपनीय
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक संक्रमितों की उम्र 22 से 25 वर्ष के बीच है। उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है। सोमवार सुबह राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा ले चुका है। पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग की कड़ी निगरानी है।
हेल्पलाइन नंबर जारी, लोगों से न घबराने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता की शंकाएं दूर करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं—
- 033-2333-0180
- 9874708858
- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू, SOP लागू
संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया गया है।
स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने कहा, “घबराने की कोई बात नहीं है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जारी है।”
चमगादड़ बताए गए वायरस के स्रोत
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने बताया कि निपाह वायरस का प्रमुख स्रोत चमगादड़ माने जाते हैं। उन्होंने कहा, “लोग ऐसे फल या खाद्य पदार्थ न खाएं जो चमगादड़ों से दूषित हो सकते हैं। निपाह से निपटने के लिए तय SOP को पूरी तरह लागू कर दिया गया है।”
पुरबा बर्धमान यात्रा, राज्य से बाहर जाने का रिकॉर्ड नहीं
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, दोनों नर्सें निजी कारणों से पुरबा बर्धमान गई थीं, हालांकि उनका राज्य से बाहर यात्रा करने का कोई इतिहास नहीं है। फिलहाल दोनों का इलाज एक निजी अस्पताल में जारी है। उनके खून के सैंपल एम्स कल्याणी भेजे गए हैं।
टेस्टिंग और इमरजेंसी से निपटने की तैयारी
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि राज्य में निपाह वायरस की जांच के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। नोडल अस्पताल चिन्हित किए जा चुके हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं। संक्रमितों के परिवारजनों को भी मेडिकल निगरानी में रखा गया है।
डॉक्टर संगठनों ने उठाए सवाल
इस बीच, कई डॉक्टर संगठनों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने आरोप लगाया कि अब तक कोई ठोस जन-जागरूकता अभियान या इमरजेंसी पब्लिक हेल्थ उपाय दिखाई नहीं दे रहे। संगठन ने पत्र में कहा कि संक्रमण रोकने के लिए ‘युद्ध स्तर’ पर कदम उठते नजर नहीं आ रहे, जिससे स्थिति को लेकर संदेह पैदा होता है।
2001 के सिलीगुड़ी प्रकोप की याद
मेडिकल कम्युनिटी का कहना है कि चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पश्चिम बंगाल 2001 में सिलीगुड़ी में निपाह वायरस के गंभीर प्रकोप का अनुभव कर चुका है। इसके बावजूद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्वारंटाइन और महामारी विज्ञान उपायों में देरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
रोजाना हेल्थ बुलेटिन की मांग
डॉक्टर संगठनों ने मांग की है कि घबराहट फैलाने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। कोविड-19 से मिले अनुभवों के आधार पर दैनिक स्वास्थ्य बुलेटिन जारी करने की भी अपील की गई है, ताकि कोई जानकारी छिपी न रहे और पारदर्शिता बनी रहे।




