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चुनावी पारदर्शिता पर जोर: बंगाल में 3 चरण, सुरक्षा बलों का व्यापक बंदोबस्त

कोलकाता से बड़ी खबर: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव तीन चरणों में कराने की तैयारी। अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड तैनाती, केंद्रीय चुनाव आयोग करेगा तैयारियों का आकलन।

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में होने वाले चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार चुनाव तीन चरणों में कराए जाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह आयोग की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी, क्योंकि 2021 में राज्य में आठ चरणों में मतदान हुआ था। आम तौर पर सुरक्षा संवेदनशीलता और प्रशासनिक कारणों से बंगाल में मतदान कई चरणों में कराया जाता रहा है।

अर्धसैनिक बलों की बड़ी तैनाती

आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राज्य में अर्धसैनिक बलों के करीब ढाई लाख जवान तैनात किए जा सकते हैं—जो पिछले चुनावों की तुलना में लगभग दोगुना होगा। उद्देश्य साफ है: मजबूत सुरक्षा के साथ कम चरणों में चुनाव संपन्न कराना। राजनीतिक हिंसा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले राज्य में यह तैनाती निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय टीम करेगी तैयारियों का जायजा

राज्य चुनाव आयोग की ओर से प्राथमिक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इसके बाद जल्द ही केंद्रीय चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल का दौरा कर जमीनी तैयारियों का आकलन करेगा। 5 जनवरी को हुई एक अहम बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उन राज्यों के चुनाव अधिकारियों से चर्चा की थी, जहां इस वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं। उसी बैठक में बंगाल के अधिकारियों ने चरण घटाने की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी।

तीन चरणों के लिए राज्य तैयार

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने संकेत दिया है कि राज्य तीन चरणों में मतदान के लिए तैयार है, बशर्ते सुरक्षा बलों की संख्या में कुछ बढ़ोतरी की जाए। इसी बीच, राजनीतिक विश्लेषक यह भी आंकलन कर रहे हैं कि कम चरणों में चुनाव होने से किसे फायदा हो सकता है।

सियासी गणित: किसे मिलेगा लाभ?

भाजपा सूत्र इस संभावना से उत्साहित नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चुनावी कार्यक्रम में ममता बनर्जी को रणनीतिक बढ़त मिलती है—वे मुद्दों को समय-समय पर बदलकर एंटी-इनकम्बेंसी को संतुलित कर पाती हैं। वहीं, कम अवधि के चुनाव में यह गुंजाइश सीमित हो जाती है। 2021 में चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चले थे और 2 मई को नतीजे आए थे। इस बार 294 सीटों पर मतदान अप्रैल के आखिरी सप्ताह या मई की शुरुआत में होने की संभावना जताई जा रही है।

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