बारिश के बाद उम्मीद टूटी, मावठा नहीं पड़ा—खंडवा में पानी की चिंता बढ़ी
खंडवा में अनियमित मानसून और मावठा नहीं गिरने से भूजल स्तर तेजी से गिरा। कूप-नलकूप सूखने लगे, किसान सिंचाई से परेशान और गर्मी में पेयजल संकट की आशंका।

खंडवा. जिले में इस बार अनियमित मानसून और मावठा नहीं गिरने का सीधा असर भूजल स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। फसलों की सिंचाई के लिए लगातार कूप और नलकूप से पानी खींचे जाने के कारण जलस्तर तेजी से गिर रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से जिले के जलाशय और तालाब पूरी क्षमता से नहीं भर सके, जिससे रिचार्ज की प्रक्रिया कमजोर रही और ठंड के मौसम में ही कई जलस्रोत दम तोड़ते नजर आ रहे हैं।
कूप-नलकूप पर पूरी तरह निर्भर हुए किसान
किसान अब सिंचाई के लिए पूरी तरह भूजल पर निर्भर हो चुके हैं। बीते छह वर्षों में पहली बार दिसंबर में मावठा नहीं गिरा, जबकि मावठा आमतौर पर जलस्तर को कुछ हद तक संभालने का काम करता रहा है।
हालांकि आंकड़ों में नवंबर तक भूजल स्तर बीते वर्षों की तुलना में बेहतर दिखा, लेकिन किसानों का कहना है कि करीब 15 साल बाद पहली बार दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अधिकांश कूप और नलकूप पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं।
बारिश में आई भारी कमी, नया हरसूद सबसे ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के अनुसार—
- गत वर्ष: 991.8 मिमी बारिश
- इस वर्ष: 858 मिमी बारिश
खंड बारिश का असर साफ नजर आया। नया हरसूद में इस बार केवल 754 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि पिछले साल यहां 1003 मिमी बारिश हुई थी। यही वजह है कि जनवरी के पहले सप्ताह से ही किसान सिंचाई को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
जिले के छह तालाब आधे खाली, नहरों से सिंचाई नहीं
अनियमित मानसून के कारण जिले के छह प्रमुख तालाब आधे खाली रह गए, जिससे नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका।
- अर्दला तालाब: 8.22%
- डाभी तालाब: 10%
इन तालाबों से केवल बैकवाटर क्षेत्र के किसानों को मोटरपंप से पानी लेने की अनुमति दी गई है।
वहीं—
- पंधाना तालाब: 18%
- कोहदड़ तालाब: 40.75%
- पलस्यापाटी तालाब: 49.44%
- देशगांव तालाब: 63.98%
- यहां से चने की फसल के लिए पलेवा और एक सिंचाई दी जा रही है।
भगवंत सागर सुक्ता बांध से राहत
भगवंत सागर सुक्ता बांध में 87.57% पानी उपलब्ध है। इसके कमांड क्षेत्र में पलेवा और तीन बार सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा जिले के 40 छोटे तालाब पूरी तरह भरे हुए हैं, जहां से भी किसानों को एक पलेवा और तीन सिंचाई दी जा रही है।
गर्मी में पेयजल संकट की आशंका
लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए गर्मी में पेयजल संकट की आशंका जताई जा रही है। यदि इसी तरह भूजल का दोहन जारी रहा और गर्मी तेज रही, तो कई जलस्रोत पूरी तरह सूख सकते हैं, जिससे स्थिति विकराल हो सकती है।




