हार के बाद नया दांव? काराकाट से लोकसभा तक की तैयारी में ज्योति सिंह
Bihar Politics: काराकाट सीट से चुनाव हारने के बाद भी ज्योति सिंह का हौसला बरकरार। फिर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान, लोकसभा चुनाव के भी दिए संकेत।

पटना. पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। ज्योति सिंह ने काराकाट विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस सीट पर सीपीआई (माले) के उम्मीदवार डॉ. अरुण सिंह कुशवाहा ने 2836 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
चुनावी नतीजों में ज्योति सिंह तीसरे स्थान पर रहीं, हालांकि उन्हें करीब 27 हजार वोट मिले थे।
हार से नहीं टूटा हौसला, फिर उतरेंगी चुनाव मैदान में
चुनाव में मिली हार के बावजूद ज्योति सिंह का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि वह फिर से चुनाव लड़ेंगी। चैनल A To Z Bihar से बातचीत में ज्योति ने कहा— “लाइफ है तो हार-जीत लगी रहेगी। अगर हार गए तो मैदान छोड़कर भाग जाएंगे, ऐसा नहीं है। 27 हजार लोगों ने मुझ पर भरोसा किया, मैं पीछे हट गई तो लोग क्या सोचेंगे? मैं डरपोक या कायर नहीं हूं। मैं मैदान नहीं छोड़ूंगी।”
“काराकाट मेरा परिवार है”
ज्योति सिंह ने कहा कि काराकाट उनके लिए सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि परिवार की तरह है। उन्होंने कहा— “30 दिन के अंदर वहां एक लहर चली और मुझे 27 हजार वोट मिले। मैंने खुद इतनी उम्मीद नहीं की थी। काराकाट की जनता के हर सुख-दुख में मैं साथ रहूंगी और फिर से वहीं से चुनाव लड़ूंगी।”
पार्टी से चुनाव लड़ने की कोशिश, लोकसभा चुनाव के भी संकेत
ज्योति सिंह ने यह भी कहा कि अगली बार उनकी कोशिश रहेगी कि वह किसी पार्टी से चुनाव लड़ें। उन्होंने साफ किया कि— अगर पार्टी से बात बनती है तो उसी के तहत चुनाव लड़ेंगी
नहीं तो कोई और राजनीतिक रास्ता तलाशेंगी
इसके साथ ही उन्होंने बड़ा संकेत देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
हार के बाद भावुक पोस्ट ने बटोरी सुर्खियां
चुनावी नतीजों के बाद ज्योति सिंह ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की थी। हाथ जोड़ते हुए अपनी फोटो के साथ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का जिक्र करते हुए लिखा— “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…” उन्होंने लिखा कि काराकाट की जनता ने उन्हें जो समर्थन दिया, उसने उन्हें और ज्यादा मजबूत और संकल्पित बनाया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि— “यह लड़ाई मैंने महिलाओं और शोषित-वंचित वर्ग के लिए लड़ी है, न कि सिर्फ जीत या हार के लिए। लोकतंत्र में लड़ना हर नागरिक का अधिकार है।”




