झारखंड की मंईयां को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, केंद्र से ₹10 हजार सहायता की मांग
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र से महिला रोजगार योजना, जीएसटी नुकसान की भरपाई, ऋण सीमा 4% और पर्यटन विकास के लिए आर्थिक सहायता की मांग की।

रांची. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए व्यापक आर्थिक सहायता की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि बिहार की तर्ज पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत झारखंड की मंईयां को भी कुटीर उद्योग स्थापित करने के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही केंद्र की कोल कंपनियों पर बकाया राशि के शीघ्र भुगतान की भी मांग की गई।
51 लाख मंईयां को मिल रहा है 2500 रुपये प्रतिमाह
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में झारखंड सरकार की ओर से 51 लाख मंईयां को प्रतिमाह 2500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन और उग्रवाद जैसी समस्याएं विरासत में मिली हैं। ऐसे में झारखंड को केंद्र सरकार से कई क्षेत्रों में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है।
ऋण सीमा 4% करने और जीएसटी नुकसान की भरपाई की मांग
वित्त मंत्री ने कहा कि माल एवं सेवा कर (GST) में कर दर युक्तिकरण के कारण झारखंड को हर वर्ष करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई केंद्र सरकार को करनी चाहिए।
इसके साथ ही एफआरबीएम एक्ट के तहत राज्य की ऋण सीमा को 3% से बढ़ाकर 4% करने की मांग की गई। उग्रवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अगले पांच वर्षों तक विशेष केंद्रीय सहायता और एसआईआर के तहत राशि उपलब्ध कराने की भी जरूरत बताई गई।
पर्यटन स्थलों के विकास के लिए केंद्र से सहयोग की अपील
राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने कई परियोजनाओं पर आर्थिक सहयोग मांगा, जिनमें प्रमुख रूप से—
- नेतरहाट, तेनुघाट और चांडिल को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करना
- हुआंगहातू गांव में स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेंथ
- तोपचांची (धनबाद) और मलय (पलामू) में लेक फ्रंट परियोजना
- चतरा में रोप-वे निर्माण
- नेतरहाट, रांची और रामगढ़ में ग्लास ब्रिज
- पतरातू में एक्वेरियम पार्क और हीलियम बैलून उड़ान
- बेतला में टाइगर सफारी
- मलूटी, बैद्यनाथ, बंशीधर, पारसनाथ, देउड़ी और अंजन धाम को जोड़कर टूरिस्ट कॉरिडोर का निर्माण शामिल है।
केंद्र के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें
वित्त मंत्री ने मजबूती से निम्नलिखित मांगें केंद्र सरकार के सामने रखीं—
- कैंसर पीड़ितों के लिए पेट-सीटी स्कैन मशीन लगाने में आर्थिक सहयोग
- 1 लाख हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए प्रतिवर्ष 2000 करोड़ रुपये
- झारखंड की रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता
- जीएसटी में हुए 4 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई
- ग्रामीण सड़कों के लिए पीएमजीएसवाई के दायरे का विस्तार
- प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता
वन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाना
झारखंड की स्थापना के बाद से राज्य के बजट में गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं, बच्चे और युवाओं के समग्र विकास को प्राथमिकता दी जाती रही है। हर वर्ष इन्हीं बिंदुओं पर केंद्र सरकार के समक्ष मांगें रखी जाती हैं और इस बार भी वित्त मंत्री ने इन्हें दोहराते हुए मजबूत पक्ष रखा है।
— प्रो. धीरज पाठक, अर्थशास्त्री




