विदेश

समुद्र से संदेश? ईरान के पास युद्धपोत, ‘वेनेजुएला ऑपरेशन’ की याद दिलाता मूव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘मैसिव अर्माडा’ की चेतावनी दी। न्यूक्लियर डील नहीं हुई तो सैन्य कार्रवाई के संकेत, ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई, अरब देशों ने संयम की अपील की।

तेहरान . अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखा रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का एक “मैसिव अर्माडा” (विशाल नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर बढ़ रहा है, जो 2025 के वेनेजुएला ऑपरेशन से भी बड़ा है। उनका स्पष्ट संदेश है कि यदि ईरान न्यूक्लियर डील पर बातचीत के लिए आगे नहीं आया, तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रंप का बयान: ‘समय खत्म हो रहा है’

28 जनवरी 2026 को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “एक मैसिव अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है।” उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द न्यूक्लियर डील पर सहमत होना होगा, अन्यथा कार्रवाई “स्पीड और वायलेंस” के साथ होगी। ट्रंप ने शर्तें भी गिनाईं— 

  • परमाणु संवर्धन पूरी तरह बंद करना
  • बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना
  • हमास, हिज़बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों को समर्थन समाप्त करना

उन्होंने जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगली कार्रवाई उससे भी अधिक कठोर हो सकती है।

क्या है ‘मैसिव अर्माडा’?

‘मैसिव अर्माडा’ से तात्पर्य अमेरिका की व्यापक सैन्य तैनाती से है, जिसमें—

  • USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर
  • कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स
  • बॉम्बर्स और फाइटर जेट्स

शामिल बताए जा रहे हैं। यह बेड़ा अरब सागर क्षेत्र में सक्रिय है। हाल ही में USS Delbert D. Black के इज़रायल के ईलात बंदरगाह पहुंचने की भी पुष्टि हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार मिडिल ईस्ट में 35,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

वेनेजुएला ऑपरेशन से तुलना क्यों?

ट्रंप ने इस तैनाती की तुलना 2025 के ‘ऑपरेशन सदर्न स्पियर’ से की है, जो वेनेजुएला के खिलाफ चलाया गया था। उस ऑपरेशन में—

  • USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप
  • 15–20 हजार सैनिक
  • 150 से अधिक एयरक्राफ्ट

शामिल थे। जनवरी 2026 में उसी ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी हुई थी। ट्रंप का दावा है कि ईरान के लिए इससे भी बड़ा सैन्य दबाव बनाया गया है।

ईरान की प्रतिक्रिया: बातचीत को तैयार, धमकी स्वीकार नहीं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की धमकी के तहत नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हमला हुआ तो ईरान आत्मरक्षा करेगा।
तेहरान में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन तेज हैं। ईरान ने—

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास

  • अपने ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी की तैनाती
  • परमाणु ठिकानों की सुरक्षा और गहराई बढ़ाने
  • जैसे कदम उठाए हैं।

तनाव बढ़ने की मुख्य वजहें

  • न्यूक्लियर प्रोग्राम: 2018 में अमेरिका के JCPOA से बाहर निकलने के बाद तनाव बढ़ा। जून 2025 में फोर्डो, नटांज और इस्फहान पर हमले हुए।
  • आंतरिक हालात: जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 100 से अधिक मौतें।
  • रीजनल संघर्ष: ईरान समर्थित संगठनों द्वारा अमेरिकी सहयोगियों पर हमले।

अरब देशों की अपील: संयम से निकले समाधान

सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, कतर, ओमान और मिस्र ने युद्ध से बचने की अपील की है। उनका मानना है कि संघर्ष बढ़ने पर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर सकता है, जिससे तेल कीमतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
वहीं यूके, फ्रांस और इज़रायल अमेरिका के रुख के करीब नजर आ रहे हैं।

स्थिति नाजुक, कूटनीति की उम्मीद बरकरार

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सैन्य कार्रवाई हुई तो यह क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है। फिलहाल ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति जारी है, लेकिन बातचीत की संभावना भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

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