जानलेवा चाइनीज मांझा: हाई कोर्ट की सख्ती, पतंग उड़ाने पर लग सकती है पाबंदी
इंदौर हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे को लेकर सख्त रुख अपनाया। अदालत में पेंसिल काटकर खतरा दिखाया गया, ई-कॉमर्स बिक्री पर रोक और नीति बनाने के निर्देश दिए गए।

इंदौर. प्रतिबंधित नायलॉन थ्रेड यानी चाइनीज मांझा को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान वकीलों ने अदालत में चाइनीज मांझा पेश किया, जिसे जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने स्वयं हाथ में लेकर परखा।
मांझे को पेंसिल पर चलाने पर पेंसिल कट गई। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब एक मजबूत पेंसिल इस मांझे से कट सकती है, तो यह आम नागरिकों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, तो पतंगबाजी पर ही पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार करना पड़ेगा।
मौतों से नाराज कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
इंदौर में 30 नवंबर को 17 वर्षीय किशोर की मौत और 7 दिसंबर को एक व्यक्ति का गला कटने की घटना के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की थी। 12 जनवरी को मृतक किशोर गुलशन के परिजनों की ओर से इंटरविनर याचिका भी दायर की गई।
घायलों की तस्वीरें देख दहल गया दिल: कोर्ट
सुनवाई की शुरुआत में ही अदालत ने कहा कि चाइनीज मांझे से हुए हादसों और घायलों की तस्वीरें देखकर दिल दहल जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इससे यह साफ जाहिर होता है कि पूर्व में जारी आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
कोर्ट के सख्त निर्देश और सुझाव
अदालत ने सरकार और प्रशासन को निम्न बिंदुओं पर गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए:
- सभी जब्त चाइनीज मांझे को खतरनाक प्लास्टिक कचरा माना जाए।
- चोट या मृत्यु की स्थिति में पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए मुआवजा नीति बनाई जाए।
- साइबर सेल को प्रमुख ई-कॉमर्स और बी2बी प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करने के निर्देश।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि नायलॉन मांझा, मोनो-काइट या सिंथेटिक स्ट्रिंग के नाम से कोई भी उत्पाद राज्य में डिलीवर न हो।
- प्रतिबंधित मांझे के निर्माण, भंडारण, बिक्री या उपयोग की सूचना देने वालों को नाम गोपनीय रखते हुए इनाम दिया जाए।
- यह मांझा गैर-बायोडिग्रेडेबल है और जलाने पर जहरीला धुआं छोड़ता है।
- जब्त स्टॉक को मालखानों में रखने के बजाय अधिकृत निस्तारण संयंत्रों में भेजा जाए।
- प्रतिबंधित मांझा ले जाते पाए जाने पर ट्रांसपोर्टर और कुरियर एजेंसियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाए।
- प्रशासन त्योहारों से पहले ही कार्रवाई शुरू करे, न कि ऐन मौके पर।
- राज्य सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाए।
ई-कॉमर्स साइट्स पर अब भी बिक रहा मांझा
इंटरविनर वकील धर्मेन्द्र गुर्जर और लखन सिंह पंवार ने कोर्ट को बताया कि 14 तारीख को यह मांझा उनके घर की छत पर पतंग के जरिए पहुंचा था। न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरण ने कहा कि कई ई-कॉमर्स साइट्स पर चाइनीज मांझा अब भी उपलब्ध है और लोग वहां से ऑर्डर कर रहे हैं। कोर्ट ने अपने सभी पुराने अंतरिम आदेशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए।
नीति बनाने के लिए डेढ़ महीने का समय
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर रोक के लिए स्पष्ट नीति बनाएं और उसे लागू करें। सरकार को इसके लिए डेढ़ महीने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे मामले
राजगढ़ (छापीहेड़ा): बाइक सवार भारत सिंह राजपूत मांझे की चपेट में आ गया। हाईनेक टी-शर्ट पहनने से गला कटने से बच गया, लेकिन होंठ पर पांच टांके आए।
जबलपुर: मझौली थाना क्षेत्र में चाइनीज मांझे से एक सारस पक्षी घायल हो गया। उसके पंख पर कट के निशान पाए गए, वन विभाग ने उपचार कराया।




