वर्दी पर दाग: डांसिंग कॉप रंजीत सिंह का डिमोशन, अश्लील चैट में नाम
इंदौर के ‘डांसिंग कॉप’ रंजीत सिंह को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक पद से हटाकर आरक्षक बनाया गया। महिला के आरोप और विभागीय जांच के बाद वरिष्ठ अधिकारियों का फैसला।

इंदौर. ‘डांसिंग कॉप’ के नाम से प्रसिद्ध ट्रैफिक पुलिस आरक्षक रंजीत सिंह को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद से हटाकर पुनः उनके मूल पद आरक्षक पर पदस्थ कर दिया गया है। लखनऊ की एक महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और विभागीय समीक्षा के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने यह निर्णय लिया है, जिसे विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
डांस स्टेप से मिली पहचान, फिर मिली जिम्मेदारी
इंदौर के हाईकोर्ट चौराहे पर अनोखे डांस स्टेप्स के जरिए ट्रैफिक नियंत्रित करने को लेकर रंजीत सिंह सोशल मीडिया और जनमानस में चर्चित हुए थे। ट्रैफिक नियंत्रण का यह तरीका आमजन को पसंद आने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद का प्रभार सौंपा था।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप
इसी बीच लखनऊ की एक महिला द्वारा रंजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए। महिला का आरोप था कि रंजीत ने उससे दोस्ती का प्रस्ताव रखा, इंदौर बुलाने और फ्लाइट टिकट व होटल की व्यवस्था कराने की बात कही। इन आरोपों के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
रक्षित केंद्र इंदौर में थे पदस्थ
कार्यवाहक प्रधान आरक्षक क्रमांक 146 रंजीत सिंह वर्तमान में रक्षित केंद्र, इंदौर में पदस्थ थे। विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत उनका कार्यवाहक प्रभार वापस लेते हुए उन्हें मूल पद पर पदस्थ किया गया है। इसकी जानकारी एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के कार्यालय द्वारा मीडिया को दी गई।
सोशल मीडिया पर वीडियो से बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले राधिका सिंह नाम की युवती ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर रंजीत सिंह पर आरोप लगाए थे। बाद में रंजीत सिंह ने सफाई देते हुए कहा था कि डेढ़ वर्ष पहले युवती ने स्वयं को उनका फैन बताते हुए लाइव ड्यूटी देखने की इच्छा जताई थी और मजाक में यात्रा व ठहरने की बात कही गई थी।
इसके बाद युवती द्वारा एक और वीडियो साझा किया गया, जिसमें रंजीत सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया पर विवाद का रूप ले लिया।
विभागीय जांच के बाद फैसला
मामला बढ़ने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने रंजीत सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बैठाई। जांच के दौरान कई शिकायतें सामने आईं। इसके आधार पर उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद से हटाकर आरक्षक के पद पर वापस भेजने का निर्णय लिया गया।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आर.के. सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनके कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। कार्यवाहक प्रधान आरक्षक बनने के बाद वे अपेक्षित स्तर पर कार्य नहीं कर पा रहे थे, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया।
अनुशासन पर सख्ती
बताया जा रहा है कि इंदौर पुलिस द्वारा ऐसे पुलिसकर्मियों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है, जो अपने कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं। पूर्व में भी इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाइयां की जा चुकी हैं।




