AI में भारत की बड़ी छलांग: इंडिया AI मिशन से वैश्विक ताकत बन रहा देश—सीएम डॉ. यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा—इंडिया एआई मिशन से भारत को वैश्विक बढ़त। स्वदेशी डेटासेट्स, जीपीयू अवसंरचना और भरोसेमंद एआई गवर्नेंस से डिजिटल नेतृत्व मजबूत।

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंडिया एआई मिशन भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने, देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है।
स्वदेशी डेटासेट्स और भरोसेमंद एआई गवर्नेंस पर फोकस
इंडिया एआई मिशन की प्रमुख विशेषताओं में स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटिंग अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क शामिल हैं। यह दृष्टिकोण डेटा संप्रभुता, अनुपालन और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित करता है।
एआई कोश और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर से स्टार्टअप्स को बढ़ावा
उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की आधारशिला हैं। ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, साथ ही सैंडबॉक्स टूल्स और निःशुल्क कंप्यूटिंग एक्सेस भी दिया जा रहा है। सब्सिडाइज्ड दरों पर 38 हजार जीपीयू उपयोग में लाए जा रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। ‘इनोवेशन सेंटर’ के माध्यम से 12 स्टार्टअप्स को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उपयोग
स्वास्थ्य क्षेत्र में केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने एआई आधारित टीबी स्क्रीनिंग समाधान विकसित किया है, जो छाती के एक्स-रे के माध्यम से जांच करता है और 105 से अधिक देशों में लागू हो चुका है। नागरिक सेवाओं में कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स का उपयोग कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर
इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के तहत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटिंग एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है।
शासन में जीआईएस–एआई का एकीकृत उपयोग
‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के जरिए जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता बढ़ी है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई का एकीकरण
भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में एआई की भूमिका
एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन रही है। कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियां किसानों के निर्णय को सरल बना रही हैं, जबकि स्वास्थ्य में एआई डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान को तेज कर रहे हैं। एमएसएमई तथा टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है।
दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी—सुरक्षित एआई अवसंरचना
सॉवरेन डेटा और कंप्यूटिंग के रणनीतिक महत्व को देखते हुए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर्स और मजबूत सप्लाई चेन का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता है। गोपनीयता, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में समाहित करना होगा। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।




