उत्तर प्रदेशराज्य

अन्नदाता की समृद्धि का मंत्र: अन्तःफसली खेती से आय बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का फोकस

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ की घोषणा की। गर्भ संस्कार को बढ़ावा देने वाली यह पहल आयुष्मान भारत के तहत बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को सशक्त बनाएगी।

लखनऊ. मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

अतिरिक्त फसल, कम लागत और सालभर स्थिर आय

मुख्यमंत्री ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है और कृषि जोखिम भी घटता है।

क्षैतिज विस्तार संभव नहीं, उत्पादकता ही एकमात्र रास्ता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है। उन्होंने कहा कि गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है, जो किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा—तीनों प्रदान करती है।

2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू होगी योजना

मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी क्षेत्र शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और देश-प्रदेश की तिलहन-दलहन आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।

वैज्ञानिक चयन और संस्थागत सहयोग पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से अंतःफसलों का चयन वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने Indian Institute of Sugarcane Research की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया।

किसानों की आय, राज्य के GVA में भी बढ़ेगा योगदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा—यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने और सहायता-अनुदान के ढांचे को स्पष्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय बढ़ाएगा और राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में भी बड़ा योगदान देगा।

कृषि को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाएगी योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल पर निर्भरता घटेगी। इससे कृषि अधिक स्थिर, सुरक्षित और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के समग्र कृषि परिदृश्य में परिवर्तन का माध्यम बनेगी।

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