डेंगू को हल्के में न लें, लापरवाही बन सकती है जानलेवा
दिल्ली में डेंगू के मामले बढ़े, शुरुआती बुखार को न करें नजरअंदाज। जानिए डेंगू के लक्षण, जांच, तीन खतरनाक अवस्थाएं और बचाव के उपाय।
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में इस बार भी डेंगू के कारण मौत के मामले सामने आ चुके हैं और इसका कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में डेंगू एक सामान्य बुखार जैसा प्रतीत होता है, लेकिन यदि समय पर सही इलाज न मिले तो यह बीमारी गंभीर और जानलेवा रूप ले सकती है। ऐसे में सतर्कता और समय पर जांच बेहद जरूरी है।
क्या होता है डेंगू
डेंगू एक वायरस जनित बीमारी है, जो मादा एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर गंदे पानी की बजाय साफ पानी में पनपता है। इसके शरीर पर चीते जैसी सफेद धारियां होती हैं और यह दिन के समय, खासकर सुबह-सवेरे अधिक सक्रिय रहता है।
आमतौर पर डेंगू का प्रकोप बरसात के मौसम और उसके तुरंत बाद यानी अगस्त से नवंबर के बीच सबसे अधिक रहता है, क्योंकि इस दौरान मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल नमी और तापमान मिल जाता है। हालांकि इस बार दिल्ली में डेंगू का असर अपेक्षाकृत देर से शुरू हुआ है।
कब दिखते हैं डेंगू के लक्षण
मच्छर के काटने के लगभग 3 से 5 दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुछ मामलों में शरीर में बीमारी पनपने की अवधि 3 से 10 दिन तक भी हो सकती है।
डेंगू के प्रकार
- डेंगू वायरस के चार प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं, जो आपस में जुड़े होते हैं।
- एक बार किसी एक प्रकार का डेंगू होने पर उसी प्रकार के खिलाफ शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है।
- हालांकि अन्य प्रकार के डेंगू से बचाव की क्षमता अस्थायी और सीमित होती है, जिससे दोबारा डेंगू होने का खतरा बढ़ जाता है।
किन हालात में कराएं जांच
इस मौसम में किसी भी तरह के बुखार को हल्के में न लें। खासकर यदि बुखार के साथ—
- जोड़ों में तेज दर्द
- आंखों या शरीर में दर्द
- त्वचा पर रैशेज दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर डेंगू की जांच कराना जरूरी है।
डेंगू की जांच कैसे होती है
डेंगू की पुष्टि के लिए मुख्य रूप से दो तरह के टेस्ट किए जाते हैं—
- एंटीजन ब्लड टेस्ट (NS-1)
- एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरोलॉजी)
डॉक्टर आमतौर पर बुखार की शुरुआती अवस्था में NS-1 टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
यदि बुखार 4 से 7 दिन तक बना रहता है, तो एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरोलॉजी) अधिक उपयुक्त माना जाता है।
क्या करें, क्या न करें
यदि बुखार 102 डिग्री तक है और कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर की सलाह से मरीज की देखभाल घर पर की जा सकती है।
क्या करें
- शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें
- मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ दें
- डॉक्टर की सलाह से हर छह घंटे में पैरासिटामॉल दे सकते हैं
क्या न करें
- दर्द निवारक दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न लें
- दो दिन तक बुखार न उतरने पर लापरवाही न करें
- यदि दो दिन में बुखार कम न हो, तो मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
डेंगू बुखार की तीन अवस्थाएं
पहली अवस्था: सामान्य डेंगू बुखार: इस अवस्था में रोगी को तेज बुखार होता है, जो 4–5 दिन तक रहता है। इसके साथ सिर, आंखों, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है। उचित इलाज से यह अवस्था ठीक हो जाती है।
दूसरी अवस्था: डेंगू हेमरेजिक फीवर: यह अवस्था अत्यंत खतरनाक होती है। इसमें रक्त प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगते हैं और आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। मरीज को उल्टी या शौच में खून आ सकता है। समय पर प्लेटलेट्स न चढ़ाए जाने पर जान का खतरा रहता है।
तीसरी अवस्था: डेंगू शॉक सिंड्रोम: इस अवस्था में मरीज का ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगता है। शरीर में शॉक के लक्षण दिखते हैं, मरीज बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होती है। धीरे-धीरे मरीज होश खो सकता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार
- आंखों के पीछे तेज दर्द
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- अत्यधिक कमजोरी और भूख न लगना
- जी मितलाना, मुंह का स्वाद खराब होना
- गले में हल्का दर्द
- चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रैशेज




