न्याय का मल्टी-ट्रैक मॉडल: फरियादियों को तीन विकल्प देने वाली CJI सूर्यकांत की नई सोच
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने ‘मल्टी-डोर कोर्टहाउस’ की अवधारणा रखी, कहा—मेडिएशन, आर्बिट्रेशन और मुकदमे तीनों विकल्प हों खुले। गोवा में बार काउंसिल ऑफ इंडिया सम्मेलन में दिया बयान।
पणजी. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और आम नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए ‘मल्टी-डोर कोर्टहाउस’ की परिकल्पना सामने रखी है। उन्होंने कहा कि अदालतें अब केवल मुकदमे चलाने की जगह नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में विवाद समाधान का एक समग्र केंद्र बनेंगी।
शुक्रवार को दक्षिण गोवा में आयोजित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन एवं मध्यस्थता संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सभी स्तरों पर बड़ी संख्या में कुशल मध्यस्थों की आवश्यकता है।
तीन विकल्प—मेडिएशन, आर्बिट्रेशन और मुकदमा
मुख्य न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि जब कोई व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचे, तो उसके सामने मेडिएशन, आर्बिट्रेशन और अंततः मुकदमे—तीनों विकल्प खुले होने चाहिए। इससे विवाद का समाधान व्यक्ति की प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार संभव हो सकेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मामलों का निपटारा मेडिएशन या आर्बिट्रेशन से संभव नहीं है, इसलिए न्यायपालिका निष्पक्ष और प्रभावी मुकदमों के लिए हमेशा तैयार रहेगी। CJI ने कहा कि मेडिएशन कानून की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे उन्नत और मानवीय अवस्था है, क्योंकि इससे समय, धन और रिश्तों—तीनों की बचत होती है।
2.5 लाख से अधिक कुशल मध्यस्थों की जरूरत
CJI सूर्यकांत ने बताया कि देश में वर्तमान में लगभग 39 हजार प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध हैं, जबकि मजबूत न्याय व्यवस्था के लिए 2.5 लाख से अधिक कुशल मध्यस्थों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थ तैयार करना केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संवेदनशीलता, धैर्य, व्यवहारिक समझ, करुणा और प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने एक प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा, “मुकदमा अक्सर टूट चुके रिश्ते का पोस्टमार्टम होता है, जबकि मेडिएशन उस रिश्ते को बचाने वाली उपचारात्मक प्रक्रिया है।”
‘मध्यस्थता की शपथ’ दिलाई
CJI ने कहा कि एक सफल मध्यस्थ वही होता है, जो केवल कानून ही नहीं, बल्कि स्थानीय भाषा, बोली, संस्कृति और मानवीय भावनाओं को भी समझता हो।
उन्होंने बताया कि जुलाई में शुरू किया गया ‘मेडिएशन फॉर नेशन’ अभियान अदालतों में लंबित मामलों को कम करने में काफी सफल रहा है। वैवाहिक, व्यावसायिक और सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को ‘मध्यस्थता की शपथ’ भी दिलाई गई।
प्रतीकात्मक पदयात्रा में भी हुए शामिल
इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और गोवा के महाधिवक्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन दक्षिण गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च में हुआ। इससे पहले CJI सूर्यकांत ने पणजी में ‘मेडिएशन जागरूकता’ के लिए आयोजित एक प्रतीकात्मक पदयात्रा में भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि मेडिएशन कम खर्चीला, समय बचाने वाला और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी समाधान है, जो समाज में सौहार्द और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करता है।




