छत्तीसगढ़

ऊर्जा महंगी, उद्योग परेशान – मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन का जोरदार विरोध

छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने बिजली दर बढ़ोतरी का विरोध करते हुए 13 मांगें रखीं। उद्योगों ने ₹5.50 प्रति यूनिट टैरिफ, 5 साल की स्थिर नीति और सरचार्ज में राहत की मांग की, वहीं कांग्रेस ने सरकार पर बिजली बिल बढ़ाने का आरोप लगाया।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बिजली दरों को लेकर उद्योग और राजनीति आमने-सामने आ गए हैं। छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि का कड़ा विरोध करते हुए 13 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा। एसोसिएशन ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से प्रदेश का लौह उद्योग गंभीर संकट में आ जाएगा, जिससे रोजगार और राजस्व दोनों प्रभावित होंगे।

‘स्टील हब’ की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका

एसोसिएशन ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील हब के रूप में पहचान बना चुका है। कम पूंजी में अधिक उत्पादन करने वाले छोटे लौह उद्योग प्रदेश के औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं और स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं। प्रदेश में करीब

  • 300 मिनी स्टील प्लांट (फर्नेस)
  • 110 स्पंज आयरन यूनिट
  • 250 रोलिंग मिल संचालित हैं, जो बिजली के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं।

ये उद्योग हर साल लगभग 750 करोड़ यूनिट बिजली की खपत कर 5 से 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व विद्युत कंपनी को देते हैं, जबकि जीएसटी के रूप में राज्य और केंद्र सरकार को 9 से 10 हजार करोड़ रुपए का योगदान करते हैं। करीब दो लाख परिवारों की रोजी-रोटी इन्हीं उद्योगों पर निर्भर है।

मौजूदा बिजली दर पर उद्योग चलाना मुश्किल

एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान बिजली दरों पर मिनी स्टील प्लांट चलाना बेहद कठिन हो गया है। अन्य राज्यों जैसे ओडिशा, झारखंड और डीवीसी से प्रतिस्पर्धा के लिए बिजली दरों को संतुलित करना जरूरी है।

ये हैं एसोसिएशन की प्रमुख 13 मांगें

  • 5 साल का मल्टी-ईयर टैरिफ (MYT) लागू किया जाए, ताकि दरें स्थिर रहें।
  • पावर इंटेंसिव उद्योगों के लिए अलग विद्युत श्रेणी बनाई जाए।
  • HV4 मिनी स्टील प्लांट के लिए औसत बिजली दर करीब ₹5.50 प्रति यूनिट तय हो।
  • लोड फैक्टर प्रोत्साहन पहले की तरह जारी रहे (50% से 74% तक)।
  • मेंटेनेंस के लिए हर माह 72 घंटे पावर ऑफ का प्रावधान।
  • लोड शेडिंग के आधार पर अतिरिक्त पावर ऑफ आवर्स।
  • FPPAS सरचार्ज को जीरो किया जाए।
  • FCA–FPPA की पारदर्शी स्वतंत्र जांच व्यवस्था।
  • सोलर बैंकिंग में कॉन्ट्रैक्ट डिमांड 20% तक पार होने पर कोई चार्ज नहीं।
  • एडवांस पेमेंट पर DPS के बराबर छूट और प्रीपेड मीटर का विकल्प।
  • विलंब भुगतान सरचार्ज प्रतिदिन के हिसाब से तय हो (0.05%)।
  • ऑटोमेटेड डिमांड सिस्टम फेल होने पर साल में एक बार पेनल्टी में छूट।
  • सोलर पावर प्लांट की अनुमति प्रक्रिया आसान हो और क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज खत्म किया जाए।

‘बिजली बिल 7 से घटाकर 5 रुपए प्रति मिनट करें’ – मनीष धुप्पड़

एसोसिएशन के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने कहा कि प्रदेश की कुल बिजली खपत का करीब 35% मिनी स्टील प्लांट करते हैं और सालाना 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व देते हैं।

इसके बावजूद उनके लिए स्थायी नीति नहीं है। उन्होंने मांग की कि बिजली बिल को ₹7 प्रति मिनट से घटाकर ₹5 किया जाए और कम से कम 5 साल की स्थिर टैरिफ नीति लागू हो, तभी उद्योग प्रतिस्पर्धा में टिक पाएंगे।

‘सरकार बिजली बिल बढ़ाना चाहती है’ – दीपक बैज

वहीं, पीसीसी चीफ दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में बिजली बिल हाफ योजना बंद कर दी गई और चार बार बिजली दर बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई इस बात का संकेत है कि सरकार फिर से बिजली दर बढ़ाने की तैयारी में है।

उद्योग बनाम बिजली दर – क्या होगा फैसला?

एसोसिएशन ने अपील की है कि बिजली दरों में वृद्धि न की जाए और नए टैरिफ ऑर्डर में उनके सुझाव शामिल किए जाएं, ताकि उद्योग, रोजगार और प्रदेश के राजस्व की रक्षा हो सके।

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