ब्लोटिंग की बड़ी वजह बन सकती है बासी फूलगोभी, खाने से पहले ऐसे करें पहचान
फूलगोभी खाने के बाद ब्लोटिंग और अपच से परेशान हैं? जानिए न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह—सफेद और पीली फूलगोभी में फर्क पहचानकर कैसे बचें डाइजेशन प्रॉब्लम से।

सर्दियों में फूलगोभी सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली सब्जियों में से एक है। पराठे, सब्जी, पकौड़ी और अचार—हर रूप में इसका स्वाद लाजवाब लगता है। लेकिन कई लोगों को फूलगोभी खाने के बाद ब्लोटिंग, अपच और पेट दर्द की समस्या होने लगती है।
इससे बचने के लिए या तो लोग फूलगोभी खाना ही छोड़ देते हैं या फिर पाचन की दवाइयों पर निर्भर हो जाते हैं। अगर आप दोनों ही परेशानियों से बचना चाहते हैं, तो खरीदते समय बस एक छोटा सा फर्क पहचानना जरूरी है।
न्यूट्रिशनिस्ट की आसान सलाह
न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के मुताबिक, फूलगोभी से होने वाली ब्लोटिंग का सबसे बड़ा कारण बासी या ज्यादा समय तक स्टोर की गई गोभी होती है। अगर सही फूलगोभी चुनी जाए, तो पाचन से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।
फ्रेश फूलगोभी पहचानने का तरीका
ताजी और बासी फूलगोभी में फर्क पहचानना बेहद आसान है—
ताजी फूलगोभी
- रंग: बिल्कुल सफेद
- बनावट: सॉफ्ट लेकिन टाइट
- फूल: आपस में जुड़े हुए
बासी फूलगोभी
- रंग: हल्का पीला या क्रीम
- बनावट: ढीली
- फूल: बिखरे हुए
पीली फूलगोभी क्यों नहीं खरीदनी चाहिए
मार्केट में अक्सर दो तरह की फूलगोभी दिखती है—एक सफेद और दूसरी हल्की पीली। ज्यादातर लोग कीड़ों को देखकर ताजगी का अंदाजा लगाते हैं, जबकि असली संकेत रंग होता है।
- पीली फूलगोभी का मतलब है कि वह ज्यादा समय तक स्टोर की गई है
- इसमें मॉइश्चर और जरूरी न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं
- विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स पहले ही टूट चुके होते हैं
- न्यूट्रिशन कम होने से पाचन तंत्र पर ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है
- यही वजह है कि हल्की पीली फूलगोभी खाने के बाद अक्सर अपच, ब्लोटिंग और पेट दर्द की शिकायत होती है।
एक छोटी सी आदत, बड़ी राहत
अगर आप चाहते हैं कि फूलगोभी स्वाद के साथ सेहत भी दे, तो हमेशा सफेद, टाइट और फ्रेश फूलगोभी ही खरीदें।
सही चुनाव करने से न सिर्फ पाचन बेहतर रहेगा, बल्कि दवाइयों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।




