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बुधवार से संसद का बजट सत्र शुरू, मनरेगा–SIR पर घमासान तय

संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। कांग्रेस और विपक्ष मनरेगा, विदेश नीति, रुपये की गिरावट, वायु प्रदूषण और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।

संसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू होने जा रहा है और इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि वे सत्र के दौरान मनरेगा, केंद्र सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित से जुड़े अनेक मुद्दों को जोर-शोर से उठाएंगे। विपक्ष SIR पर भी विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।

बजट सत्र से पहले सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्र को लेकर चर्चा हुई, हालांकि कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई कि सरकार ने कोई विधायी एजेंडा बैठक में प्रस्तुत नहीं किया। सरकार का कहना है कि एजेंडा बाद में साझा किया जाएगा, क्योंकि सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और केंद्रीय बजट पर चर्चा प्रस्तावित है।

राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने सरकार पर संविधान से मिले अधिकारों को कमजोर करने और संवैधानिक संस्थाओं को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष विदेश नीति का मुद्दा भी उठाएगा और सवाल किया, “हमारी विदेश नीति आज कहां खड़ी है? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं दिख रहा है।”

प्रमोद तिवारी ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और रूसी तेल की खरीद से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। साथ ही दिल्ली समेत कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला उठाने की बात कही।

सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस का रुख

सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा एक अहम मुद्दा है, क्योंकि सरकार ने नया कानून लाकर न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सीमित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने, वोट चोरी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी सत्र में उठाए जाएंगे।

कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को पूरी तरह बहाल किया जाए। वहीं लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत जिन विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है, उन पर संसद में चर्चा जरूरी है। उन्होंने अमरावती को हैदराबाद की तर्ज पर “कानूनी दर्जा” देने की भी मांग रखी।

सस्मित पात्रा ने बताया कि उनकी पार्टी ओडिशा में किसानों की समस्याओं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाएगी। कुल मिलाकर, बजट सत्र के पहले दिन से ही सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।

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