भोपाल में वैलेंटाइन डे पर टकराव की स्थिति, पार्क के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भोपाल में वैलेंटाइन डे पर बजरंग दल और हिंदू परिषद का विरोध प्रदर्शन, चिनार पार्क समेत कई जगहों पर पुलिस तैनात। प्रशासन ने कानून हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।

भोपाल. राजधानी भोपाल में वैलेंटाइन डे के मौके पर शुक्रवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ लेकर चिनार पार्क के बाहर इकट्ठा हुए और सार्वजनिक स्थलों पर ‘मर्यादा’ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों ने चेतावनी दी कि आपत्तिजनक स्थिति में मिले जोड़ों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन अलर्ट, प्रमुख जगहों पर कड़ी सुरक्षा
- संभावित विवाद को देखते हुए पुलिस ने शहर के पार्क, मॉल, होटल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी।
- चिनार पार्क के बाहर पुलिस बल तैनात
- शांति भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
- नागरिकों से कानून का पालन करने की अपील
- पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
संगठनों की सख्त चेतावनी
- राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत मंत्री राकेश प्रजापति ने कहा कि
- सार्वजनिक स्थानों पर ‘अश्लीलता’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी
- आपत्तिजनक स्थिति में मिले युवाओं के खिलाफ सार्वजनिक विरोध होगा
- हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि जबरन या हिंसक कार्रवाई करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
15 निगरानी दस्ते गठित
संस्कृति बचाओ मंच ने शहरभर में होटल, मॉल और पार्कों पर नजर रखने के लिए 15 निगरानी टीमें बनाने का दावा किया है। वहीं बजरंग दल ने भी करीब एक दर्जन टीमों की तैनाती की घोषणा की।
‘दंड पूजन’ से शुरू हुआ विरोध
वैलेंटाइन डे से एक दिन पहले संगठनों ने ‘दंड पूजन’ कर अपने अभियान की शुरुआत की थी। उनका कहना है कि वे प्रेम के खिलाफ नहीं बल्कि सार्वजनिक मर्यादा भंग करने के विरोध में हैं।
महाशिवरात्रि मनाने की अपील
संगठनों ने युवाओं से वैलेंटाइन डे के बजाय अगले दिन आने वाली महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की अपील की है।
होटल संचालकों को भी चेतावनी
कुछ संगठनों ने होटल और रेस्टोरेंट संचालकों से 14 फरवरी को विशेष आयोजन नहीं करने को कहा है।
सांस्कृतिक बहस फिर तेज
- हर साल की तरह इस बार भी शहर में दो मत सामने आए—
- एक पक्ष इसे निजी अभिव्यक्ति और उत्सव का दिन मानता है
- दूसरा पक्ष इसे भारतीय परंपरा के खिलाफ बताता है
- प्रशासन ने दोहराया कि सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




