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बांग्लादेश में मानवता शर्मसार: हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या, शव को आग के हवाले किया

बांग्लादेश के मयमनसिंह में कट्टरपंथी हिंसा की खौफनाक घटना, हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और शव जलाया गया। अंतरिम सरकार ने घटना की कड़ी निंदा कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।

नई दिल्ली. बांग्लादेश में जारी हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बीच कट्टरपंथ का एक बेहद भयावह मामला सामने आया है। भारत विरोधी प्रदर्शनों के बीच मयमनसिंह में एक हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में शव को पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया। घटना के वक्त प्रदर्शनकारी ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते रहे।

इस्लाम के अपमान के आरोप में भीड़ का हमला

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान 30 वर्षीय दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। आरोप है कि इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर फैली अफवाहों के बाद गुस्साई भीड़ ने दीपू पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद शव को पेड़ से बांधकर जलाया

घटना के बाद हालात और भयावह हो गए। भीड़ ने दीपू चंद्र दास के शव को रस्सी से एक पेड़ से बांधा, नारेबाजी की और फिर उसे आग लगा दी। इस जघन्य घटना से इलाके में दहशत फैल गई और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई।

शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा

यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में पहले से ही हिंसक विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। हादी की मौत को लेकर देशभर में उबाल है, जिसका असर अब सांप्रदायिक हिंसा के रूप में भी दिखने लगा है।

अंतरिम सरकार ने की कड़ी निंदा

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। सरकार ने कहा कि “नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है” और इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

हिंसा और नफरत को खारिज करने की अपील

इससे पहले अंतरिम सरकार ने एक बयान में कहा था, “इस मुश्किल घड़ी में हम हर नागरिक से अपील करते हैं कि वे हिंसा, उकसावे और नफरत को खारिज कर शहीद हादी का सम्मान करें।”

कार्यस्थल पर टिप्पणी के बाद फैला तनाव

बांग्लादेशी बंगाली मीडिया आउटलेट बार्ता बाजार के अनुसार, दीपू चंद्र दास पर विश्व अरबी भाषा दिवस के अवसर पर एक कारखाने में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।
यह आरोप फैलते ही इलाके में तनाव पैदा हो गया, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा।

प्रशासन ने की घटना की पुष्टि

घटना की पुष्टि करते हुए भालुका उपजिला के कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद फिरोज हुसैन ने कहा कि पैगंबर के अपमान के आरोप में एक व्यक्ति की हत्या की गई है और शव फिलहाल पुलिस हिरासत में है। वहीं, अवामी लीग के नेता मोहम्मद अली अराफात ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि बांग्लादेश तेजी से कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा है।

यूनुस ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

गुरुवार देर रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए मुहम्मद यूनुस ने कहा, “आज मैं आपके सामने बेहद दुखद खबर लेकर आया हूं। जुलाई विद्रोह के निडर अग्रिम पंक्ति के योद्धा और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी अब हमारे बीच नहीं रहे।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस क्रूर हत्या में शामिल लोगों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और दोषियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

हिंसा की खुलकर निंदा

यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने फेसबुक पर बांग्ला में पोस्ट कर हिंसा, धमकी, आगजनी और जान-माल के नुकसान की कड़ी निंदा की। सरकार ने हादी को शहीद बताते हुए जनता से हिंसा, उकसावे और नफरत से दूर रहने की अपील की है।

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