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‘प्यार अब टिकता नहीं?’ अनन्या पांडे के बयान से रिश्तों पर बहस तेज

मुंबई. बदलते समय के साथ रिश्तों की परिभाषा भी तेजी से बदली है। कमिटमेंट से दूरी, बढ़ते ब्रेकअप और तलाक—ये सब आज के मॉडर्न रिलेशनशिप की पहचान बनते जा रहे हैं। इसी विषय पर हाल ही में अनन्या पांडे ने द कपिल शर्मा शो में खुलकर बात की। एक्ट्रेस ने आज के प्यार की तुलना 90 के दशक के रिश्तों से करते हुए इसे “पॉपकॉर्न जैसा” बताया—जो जरा-सी गर्मी में उछल जाता है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया में तीखी बहस छिड़ गई है; कुछ लोग सहमत हैं तो कुछ असहमति जता रहे हैं।

अनन्या हाल ही में कार्तिक आर्यन के साथ फिल्म तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी में नजर आई थीं। अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाने वाली अनन्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

“पहले का प्यार था इंश्योरेंस पॉलिसी जैसा”

शो में बातचीत के दौरान अनन्या ने कहा कि पहले के दौर का प्यार एक तरह से इंश्योरेंस पॉलिसी जैसा होता था—एक बार कमिटमेंट हो जाए, तो उम्र भर निभाने का इरादा रहता था। आज के रिश्तों में उन्हें यह स्थिरता कम नजर आती है। उनके शब्दों में, “आज का प्यार पॉपकॉर्न जैसा हो गया है—थोड़ी सी गर्मी और लोग उछलने लगते हैं।”

“लिव-इन को कमिटमेंट समझने लगे हैं लोग”

एक्ट्रेस का कहना है कि आजकल लोग लिव-इन रिलेशनशिप को ही कमिटमेंट मान लेते हैं। खर्चा शेयर करना या किराया बांटना कमिटमेंट नहीं, यह तो रूममेट्स भी करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छोटी-छोटी बातों—जैसे फोन पासवर्ड शेयर न करने—पर भी ब्रेकअप हो रहे हैं, जिससे रिश्तों में लॉयल्टी कमजोर पड़ती जा रही है।

डिजिटल दौर ने रिश्तों को कैसे बदला?

इस मुद्दे पर आकाश हेल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर का कहना है कि डिजिटल लाइफ ने कमिटमेंट को देखने का नजरिया बदल दिया है।

उनके अनुसार—

  • डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया पर अनगिनत विकल्प दिखते हैं।
  • ज्यादा विकल्प होने पर लोग कमिटमेंट से घबराते हैं।
  • “बेहतर ऑप्शन” की सोच रिश्तों को कमजोर करती है।
  • थोड़ी-सी बोरियत में लोग कोशिश की बजाय ब्रेकअप चुन लेते हैं।
  • सोशल मीडिया के कारण इमोशनल कनेक्शन कमजोर पड़ रहा है।

डॉ. शंकर मानती हैं कि आज भी कमिटमेंट मौजूद है, लेकिन वह शर्तों और टाइमलाइन पर आधारित हो गया है—कुछ हद तक सब्सक्रिप्शन मॉडल की तरह।

जल्दी ब्रेकअप क्यों हो रहे हैं?

मनोविज्ञान के अनुसार, रिश्ते जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही तेजी से टूट भी जाते हैं। इसके प्रमुख कारण हैं—

  • बेहतर विकल्प छूट जाने का डर
  • सोशल मीडिया से बढ़ती इमोशनल दूरी
  • सोच के फर्क को इनकम्पैटिबिलिटी मान लेना
  • मुश्किल वक्त में कोशिश करने के बजाय रिश्ते से बाहर निकल जाना

क्या खर्चा शेयर करना ही कमिटमेंट है?

अनन्या के मुताबिक, साथ रहना या खर्चा बांटना इमोशनल कनेक्शन की गारंटी नहीं देता। इस पर डॉ. शंकर भी सहमत हैं—उनका कहना है कि सुविधा कमिटमेंट नहीं होती; कठिन हालात में भी रिश्ते को निभाने की कोशिश ही असली कमिटमेंट है।

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