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ऊर्जा परिवर्तन में सुपर-बिग मूव! अदाणी करेंगे रिकॉर्ड स्तर का निवेश

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने मंगलवार को कहा कि उनका समूह अगले पांच वर्षों में ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) के क्षेत्र में 75 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करेगा।

धनबाद. अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने मंगलवार को कहा कि उनका समूह अगले पांच वर्षों में ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) के क्षेत्र में 75 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करेगा। उन्होंने यह घोषणा आईआईटी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद के 100वें स्थापना दिवस समारोह में की।

गुजरात के खावड़ा में 520 वर्ग किमी में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क

अदाणी ने बताया कि समूह गुजरात के खावड़ा में 520 वर्ग किलोमीटर में फैला दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा— “2030 तक पूरी क्षमता पर यह पार्क 30 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पन्न करेगा, जो औसत घरेलू खपत के हिसाब से हर साल छह करोड़ से अधिक घरों को बिजली उपलब्ध करा सकती है।”

10 गीगावाट क्षमता स्थापित, सबसे कम लागत वाली हरित ऊर्जा देने की तैयारी

अदाणी के अनुसार—

  • 10 गीगावाट क्षमता की स्थापना पहले ही पूरी हो चुकी है।
  • समूह का लक्ष्य दुनिया की सबसे कम लागत वाली हरित ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
  • उन्होंने कहा कि यह पहल ऊर्जा परिवर्तन में वैश्विक मानक स्थापित करेगी।

भारत की बिजली खपत दुनिया से अभी भी पीछे

अदाणी ने कहा कि—

  • भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उपभोक्ता है।
  • लेकिन प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1,400 kWh प्रति वर्ष से भी कम है।
  • यह वैश्विक औसत के आधे से भी कम,
  • अमेरिका के 10वें हिस्से, और यूरोप के पांचवें हिस्से के बराबर है।

सीओपी-30 चर्चा में भारत की स्थिरता रैंकिंग पर सवाल

अदाणी ने वैश्विक स्थिरता बहस का उल्लेख करते हुए कहा कि— “सीओपी-30 में जारी एक रिपोर्ट में भारत की स्थिरता रैंकिंग घटा दी गई, यह तर्क देते हुए कि हमारे यहां कोयला निकासी की समयसीमा तय नहीं है और कोयला ब्लॉक की नीलामी जारी है।”

कम उत्सर्जन के बावजूद भारत पर अधिक दबाव: अदाणी का तर्क

अदाणी ने कहा— कुल कार्बन उत्सर्जन में भारत भले ही तीसरे स्थान पर हो, लेकिन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन केवल दो टन से कम है। तुलना में—

  • अमेरिका: 14 टन
  • चीन: 9 टन
  • यूरोप: 6 टन

उन्होंने आगे कहा— “200 वर्षों की औद्योगिक गतिविधि के संचयी वैश्विक उत्सर्जन में भारत केवल 4% के लिए जिम्मेदार है, जबकि यूरोप 13%, अमेरिका 19% और चीन 20% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।”

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