जल-आपदा की दस्तक: MP में गांवों तक फैला ज़हरीला पानी, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
मध्य प्रदेश में पीने के पानी का संकट गहराया—जल जीवन मिशन की रिपोर्ट में खुलासा, ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी असुरक्षित। इंदौर त्रासदी के बाद हाई कोर्ट ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बताया।

भोपाल. इंदौर के भागीरथपुरा में पीने के पानी से हुई 20 मौतों के बाद मध्य प्रदेश में जल सुरक्षा को लेकर बड़ा और डराने वाला सच सामने आया है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन की नई फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट ने बताया है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है। यह संकट केवल पानी की उपलब्धता का नहीं, बल्कि दूषित और जानलेवी सप्लाई का बनता जा रहा है।
रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
4 जनवरी 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि राष्ट्रीय औसत 76% है। यानी राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए। इनमें खतरनाक बैक्टीरिया और रासायनिक मिलावट मिली है। ये नमूने सितंबर–अक्टूबर 2024 के दौरान 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से लिए गए थे।
अस्पताल और स्कूल भी सुरक्षित नहीं
- स्थिति उन जगहों पर और गंभीर है, जहां सुरक्षा और इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
- सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल जांच में पास हुए, जबकि राष्ट्रीय औसत 83.1% है।
- इसका मतलब है कि प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी मिल रहा है।
- स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल पाए गए, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य लगातार खतरे में है।
इन जिलों में हालात सबसे बदतर
अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक नमूने दूषित मिले।
राज्य में केवल 31.5% घरों में नल कनेक्शन हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 70.9% है। भले ही 99.1% गांवों में पाइपलाइन पहुंच चुकी हो, लेकिन सिर्फ 76.6% घरों में ही नल चालू हालत में हैं। यानी हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।
100% नल कनेक्शन, फिर भी सुरक्षित पानी नहीं
इंदौर, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला जिला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे प्रदेश में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं। केंद्र सरकार ने इसे “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” बताया है और चेतावनी दी है कि सुधार नहीं होने पर फंड में कटौती हो सकती है।
इंदौर त्रासदी और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत, 429 लोग अस्पताल में भर्ती, 16 ICU में और 3 वेंटिलेटर पर हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हालात को औपचारिक रूप से ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है और मौजूदा स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।




