डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे का दायरा मजबूत: वार्षिक आय में दर्ज हुई 11.47% की बढ़त
वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी फोनपे का एकीकृत परिचालन राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 11.47 प्रतिशत बढ़कर ₹7,920 करोड़ हो गया है। नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, सरकारी यूपीआई प्रोत्साहन राशि के अगले वित्त वर्ष में शामिल होने की उम्मीद के बीच कंपनी के एकीकृत शुद्ध घाटे में विशेष खर्चों का प्रभाव देखा गया है।
देश की प्रमुख फिनटेक कंपनी फोनपे ने हाल ही में कंपनी रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के एकीकृत परिचालन राजस्व में 11.47 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़त के साथ ही कुल परिचालन आय ₹7,920 करोड़ के स्तर पर पहुँच गई, जो डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में कंपनी की मजबूत पैठ और व्यावसायिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाती है।
पूर्व वित्तीय वर्ष के आंकड़ों की तुलना
कंपनी के पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करने पर व्यापारिक गतिविधियों में बड़ा परिवर्तन देखा जा सकता है। इससे पहले के वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कंपनी ने ₹815 करोड़ की परिचालन आय दर्ज की थी। पिछले आंकड़े की तुलना में इस बार का वित्तीय प्रदर्शन कंपनी की सेवाओं के इस्तेमाल और बाजार में उपयोगकर्ताओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करता है।
प्रोत्साहन राशि और लेखा-जोखा में समायोजन
सरकार द्वारा डिजिटल प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता राशि का प्रभाव भी इस बार के वित्तीय परिणामों पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यूपीआई प्रोत्साहन राशि जारी न होने के कारण इससे मिलने वाले राजस्व को वर्तमान वार्षिक खातों में शामिल नहीं किया गया है। कंपनी प्रबंधन को उम्मीद है कि यह बकाया प्रोत्साहन राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लेखा-जोखा में दर्ज की जाएगी।
शुद्ध घाटे और व्यावसायिक लागत का विश्लेषण
सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों के आधार पर समीक्षा की जाए तो वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹1,377 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। इसके अतिरिक्त, सभी घटकों को शामिल करते हुए कुल एकीकृत शुद्ध घाटा ₹2,792 करोड़ दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा व्यावसायिक विस्तार और परिचालन से जुड़ी लागतों के संतुलन को प्रदर्शित करता है।
घाटे के मुख्य कारण और असाधारण वित्तीय मदें
कंपनी के अंतिम घाटे के आंकड़ों में कई एकमुश्त खर्चों और विशेष आय का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इनमें कर्मचारियों के लिए शेयर विकल्प योजना से जुड़े विशेष आबंटन, गैर-नकद संपत्तियों के मूल्य में आई कमी, तथा बंद किए गए व्यावसायिक प्रभागों से हुआ नुकसान शामिल है। वहीं दूसरी ओर, एक सहयोगी इकाई में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचने से प्राप्त लाभ ने भी अंतिम वित्तीय गणना को प्रभावित किया है।




