छत्तीसगढ़

CM हेल्पलाइन 1076 का चमत्कार: 65% दिव्यांग चांदनी को एक शिकायत पर मिली पेंशन

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी वरदान! जशपुर की 65% दिव्यांग चांदनी यादव को एक कॉल पर मिली सामाजिक सुरक्षा पेंशन। जानें कैसे काम करती है साय सरकार की यह 24 घंटे एक्टिव रहने वाली जनहितैषी हेल्पलाइन।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का सबसे बड़ा और भरोसेमंद जरिया बन चुकी है। इस हेल्पलाइन के जरिए अब एक और जरूरतमंद को न्याय मिला है। जशपुर जिले की 65 प्रतिशत दिव्यांग बेटी चांदनी यादव को सिर्फ एक शिकायत दर्ज कराने के बाद सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ मिल गया है। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए समय-सीमा के भीतर न सिर्फ मामले का निपटारा किया, बल्कि पीड़िता की पेंशन भी स्वीकृत कर दी।

एक कॉल और मिल गया अधिकार, जशपुर का मामला

पूरा मामला जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत घरजियाबथान का है। यहाँ के निवासी योगेश यादव ने अपनी दिव्यांग पुत्री चांदनी यादव को पेंशन न मिलने से परेशान होकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत मिलते ही जनपद पंचायत पत्थलगांव और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने मामले को पूरी गंभीरता से लिया। पंचायत सचिव के माध्यम से जरूरी दस्तावेज मंगाकर त्वरित जांच की गई, जिसमें चांदनी को पात्र पाया गया। अब चांदनी को नियमित रूप से दिव्यांग पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो गया है। राहत मिलने पर पिता योगेश यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का दिल से आभार जताया है।

24 घंटे सक्रिय है मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, व्हाट्सएप से भी जुड़ाव

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 राज्य सरकार की जवाबदेह और जनहितैषी कार्यप्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • 24/7 सर्विस: यह हेल्पलाइन सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे तीन शिफ्टों में काम करती है।
  • व्हाट्सएप सपोर्ट: शिकायतों को और आसान बनाने के लिए इसे व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है।
  • बड़ा नेटवर्क: शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी इस सिस्टम से सीधे जुड़े हुए हैं।
  • यूनिक आईडी ट्रैकिंग: हर शिकायत को एक यूनिक आईडी मिलती है, जिससे आवेदक अपनी शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है।

संतुष्टि न होने पर उच्च अधिकारियों को स्वतः ट्रांसफर होता है केस

इस हेल्पलाइन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारदर्शी व्यवस्था है। यदि कोई शिकायतकर्ता निचले स्तर पर किए गए समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो प्रकरण स्वतः ही उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण और कड़ी जांच के लिए ट्रांसफर हो जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय और सचिव स्तर के अधिकारी स्वयं इस पूरी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं, जिससे लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

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