मध्य प्रदेश

भोपाल के होटल रेडिसन पर तगड़ा जुर्माना: ₹60 की पानी की बोतल पर वसूला एक्स्ट्रा टैक्स, अब भुगतेंगे ₹8000 का हर्जाना

भोपाल के होटल रेडिसन पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया ₹8,000 का जुर्माना. ₹60 की पानी की बोतल पर ₹175 वसूलने और ऊपर से अतिरिक्त GST लगाने को आयोग ने माना गलत. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

भोपाल: ₹60 की पानी की बोतल पर ₹175 वसूलने वाले भोपाल के प्रतिष्ठित होटल रेडिसन पर जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि होटल और रेस्टोरेंट अपनी सुविधाओं के एवज में एमआरपी (MRP) से ज्यादा कीमत वसूल सकते हैं, लेकिन उस बढ़ी हुई राशि पर अलग से जीएसटी (GST) वसूलना पूरी तरह से गैरकानूनी है. इस अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए आयोग ने होटल पर ₹8,000 का जुर्माना लगाया है और तय समय पर भुगतान न करने पर 9% वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है.

₹60 की बोतल का बिल आया ₹175, विरोध करने पर स्टाफ ने की बदसलूकी

यह मामला अप्रैल 2022 का है, जब रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे. डिनर के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली, जिस पर प्रिंटेड एमआरपी ₹60 दर्ज थी. हालांकि, जब बिल आया तो कुल राशि ₹6,809.88 थी और उसमें पानी की बोतल की कीमत ₹175 जोड़ी गई थी. हुकुम सिंह ने जब इस अत्यधिक कीमत पर आपत्ति जताई, तो होटल प्रबंधन ने राशि कम करने से साफ मना कर दिया. शिकायतकर्ता के अनुसार, विरोध करने पर होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस और अभद्र व्यवहार भी किया, जिसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.

होटल का तर्क: “हम सिर्फ पानी नहीं, आतिथ्य और लग्जरी सेवाएं देते हैं”

मामले की सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन ने उपभोक्ता आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि होटल और रेस्टोरेंट में बेची जाने वाली वस्तुएं महज एक प्रोडक्ट नहीं होतीं. उनके साथ ग्राहकों को एयर कंडीशनिंग, बैठने की आलीशान व्यवस्था, लाउंज, बैकग्राउंड म्यूजिक, सर्विस और अन्य आतिथ्य (Hospitality) सेवाएं भी दी जाती हैं. होटल का कहना था कि बोतल पर अंकित एमआरपी केवल रिटेल दुकानों के लिए होती है. उन्होंने मेन्यू कार्ड का हवाला देते हुए कहा कि उसमें पहले से स्पष्ट लिखा था कि टैक्स अलग से देय होगा.

उपभोगता आयोग का फैसला: कीमत जायज, लेकिन टैक्स वसूली में हुई गड़बड़ी

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए होटल के इस तर्क को सही माना कि होटल में एमआरपी से ज्यादा कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है और इसे सेवा में कमी नहीं कहा जा सकता.

आयोग की मुख्य टिप्पणी: आयोग ने कहा कि होटल द्वारा तय की गई ₹175 की कीमत में ही जीएसटी (GST) को शामिल माना जाएगा. इसके बावजूद होटल ने उस पर अलग से 18% जीएसटी के रूप में ₹10.80 वसूले, जो कि पूरी तरह से अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) और सेवा में कमी है.

आयोग द्वारा होटल को दिए गए निर्देश:

  • ग्राहक से अतिरिक्त वसूले गए ₹10.80 तुरंत लौटाए जाएं.
  • मानसिक प्रताड़ना के एवज में ₹5,000 का मुआवजा दिया जाए.
  • वाद व्यय (कोर्ट कचहरी के खर्च) के रूप में ₹3,000 का भुगतान किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के इन 2 बड़े फैसलों का हुआ जिक्र

उपभोक्ता आयोग ने एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के अधिकार को लेकर दो प्रमुख अदालती मामलों का संदर्भ दिया:

  • फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ (2017): इसमें माना गया कि होटल-रेस्टोरेंट संस्थागत उपभोक्ता हैं, जो अपनी सेवाओं के साथ उत्पाद परोसते हैं, इसलिए उन पर रिटेल एमआरपी नियम लागू नहीं होते.
  • आईटीसी लिमिटेड बनाम के.सी. खन्ना (2023): इस फैसले के तहत भी आतिथ्य सेवाओं में अतिरिक्त मूल्य वसूलने को वैध माना गया है.

परिवादी पक्ष के वकील शशिकांत वर्मा ने कहा कि यह मामला सिर्फ ₹10.80 का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का है. यह फैसला देश के सभी उपभोक्ताओं को संदेश देता है कि अनुचित वसूली के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय जरूर मिलता है.

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