राम मंदिर चढ़ावा केस: SIT की जांच पूरी, चंपत राय समेत 3 दिग्गजों में तकरार, नृपेंद्र मिश्रा बोले— ‘ये चोरी नहीं, डाका है!’
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की 6 दिनों की जांच पूरी हो चुकी है। चंपत राय सहित 150 लोगों से पूछताछ के बाद तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट आज सीएम योगी को सौंपी जाएगी।
अयोध्या/लखनऊ. अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में वित्तीय अनियमिताओं को लेकर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी शुरुआती तफ्तीश पूरी कर ली है। 15 जून को अयोध्या पहुंची तीन सदस्यीय एसआईटी टीम करीब 150 लोगों से मैराथन पूछताछ और साक्ष्यों को खंगालने के बाद लखनऊ लौट चुकी है। सोमवार सुबह 11 बजे यह प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, जांच में कदम-कदम पर गंभीर खामियां और गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके बाद मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और सख्त कानूनी कार्रवाई के आसार जताए जा रहे हैं।
कदम-कदम पर गड़बड़ी: पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर मढ़ा दोष
एसआईटी की छह दिनों की सघन जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- आपसी तकरार: जांच के आखिरी दिन जब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई, तो पदाधिकारियों ने कमियों के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।
- मिटाए गए सबूत: जांच टीम को चढ़ावा गणना कक्ष के कई महत्वपूर्ण सीसीटीवी (CCTV) फुटेज डिलीट मिले हैं। इसके अलावा मंदिर को मिलने वाले सोने-चांदी के चढ़ावे का कोई पुख्ता ब्योरा या रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया जा रहा था।
- जांच का दायरा बढ़ा: गड़बड़ी मिलने के बाद एसआईटी ने जांच में ट्रस्ट के पैसों से हुई जमीनों की खरीद-फरोख्त, सामग्री आपूर्ति और ठेकेदारों के भुगतानों को भी शामिल कर लिया है।
अखिलेश यादव के आरोपों और महिपाल सिंह के दावों से गर्माया मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी, जिसमें उन्होंने करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब होने का आरोप लगाते हुए कोर्ट से संज्ञान लेने की मांग की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भी इस हमले में शामिल हो गए।
इस बीच, राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी और विहिप नेता महिपाल सिंह के एक वायरल वीडियो ने आग में घी का काम किया। महिपाल सिंह ने सीधे तौर पर चंपत राय और गोपाल राव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2021 में ही नोटों की गड्डियों की गिनती में ₹5 लाख की चोरी रंगे हाथों पकड़ी थी, लेकिन शिकायत करने पर उन्हें ही पद से हटा दिया गया और सीसीटीवी फुटेज डिलीट करा दिए गए।
नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान: ‘यह चोरी नहीं, बल्कि डाका है’
विपक्ष और संतों के भारी दबाव के बीच निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा दिल्ली के विशेष निर्देश पर अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने टीवी इंटरव्यूज में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे ‘डाका’ करार दिया। मिश्रा ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में तय नियमों का 10 प्रतिशत भी पालन नहीं किया जा रहा था। उनके इस तीखे रुख से साफ है कि एसआईटी की रिपोर्ट में भी बड़ी लापरवाहियां उजागर होने वाली हैं।
एसआईटी (SIT) टीम में कौन-कौन हैं शामिल?
संतों और पूर्व सांसद विनय कटियार के आक्रोश के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस हाई-लेवल 3-सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था:
| अधिकारी का नाम | पद/विभाग | एसआईटी में भूमिका |
| विजय विश्वास पंत | मंडलायुक्त, लखनऊ | अध्यक्ष/प्रमुख |
| किरन एस. | आईजी (IG), लखनऊ रेंज | सदस्य |
| नील रतन | विशेष सचिव, वित्त विभाग | सदस्य |
सीएम योगी का रुख: दो दिन पहले अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से इस संवेदनशील मुद्दे पर अनावश्यक बयानबाजी न करने की अपील की थी और कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब सबकी निगाहें सोमवार को होने वाली बैठक और मुख्यमंत्री के कड़े फैसले पर टिकी हैं।




