गोल्ड 6.5% और सिल्वर 11% टूटा, जून में चमक फीकी पड़ गई
जून महीने में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोना प्रति 10 ग्राम करीब 10,070 रुपये और चांदी 30,448 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हुई है। जानिए विशेषज्ञों की राय।
नई दिल्ली. इस महीने कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान और अमेरिका के बीच वैश्विक तनाव कम होने के बाद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली इन कीमती धातुओं से थोड़ा कम हुआ है, जिसका सीधा असर इनकी कीमतों पर पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 6.50% और चांदी में 11.56% तक की भारी गिरावट आई है।
जून महीने में ऐसे धड़ाम हुईं कीमतें (MCX के आंकड़े)
एमसीएक्स (MCX) पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक महज कुछ ही दिनों के भीतर सोने-चांदी के खरीदारों को बड़ी राहत मिली है:
- सोना (Gold): 1 जून को सोने का भाव 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 19 जून तक गिरकर करीब 1,44,938 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। यानी सोने की कीमत में 10,070 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी कमी आई है।
- चांदी (Silver): चांदी का भाव 2,63,458 रुपये प्रति किलो से लुढ़ककर 2,33,010 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इस तरह चांदी में करीब 30,448 रुपये प्रति किलो की भारी गिरावट दर्ज की गई।
क्यों लुढ़की सोने-चांदी की कीमत? जानें 5 बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक सोने और चांदी में आई इस हालिया गिरावट के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक महंगाई की चिंता।
- केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी।
- गोल्ड और सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) से निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई निकासी।
हालांकि, इन तात्कालिक कारणों के बावजूद विशेषज्ञों का दृढ़ विश्वास है कि लंबी अवधि (Long Term) में सोने और चांदी की मांग मजबूत बनी रह सकती है।
क्या पुराने निवेशकों को नुकसान में बेच देना चाहिए?
पिछले डेढ़ साल में सोने और चांदी में आई रिकॉर्ड तेजी के कारण कई रिटेल निवेशकों ने बहुत ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। ऐसे निवेशक अब इस असमंजस में हैं कि वे घाटा उठाकर अपनी होल्डिंग बेच दें या बाजार में बने रहें।
विशेषज्ञों की राय: मास्टर कैपिटल सर्विसेज के निदेशक पुनीत सिंघानिया के अनुसार, “तेजी के बाद आने वाली ऐसी गिरावट हमेशा ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं होती। अगर आपने लंबे समय के नजरिए से निवेश किया है, तो केवल कीमतों में अस्थाई गिरावट देखकर जल्दबाजी में बाजार से निकलना सही फैसला नहीं होगा। निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए।”
नए निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
रिद्धिसिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी का मानना है कि मौजूदा गिरावट नए निवेशकों के लिए एंट्री करने का एक बेहतरीन मौका हो सकती है, लेकिन उन्हें एक साथ अपनी पूरी पूंजी लगाने (Lump sum) से बचना चाहिए।
- SIP का तरीका अपनाएं: नए निवेशक अगले 6 से 12 महीने के दौरान धीरे-धीरे निवेश करें। इसके लिए गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के जरिए एसआईपी (SIP) का विकल्प सबसे बेस्ट है।
- पोर्टफोलियो का नियम: विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी आदर्श पोर्टफोलियो में सोने और चांदी का हिस्सा कुल एसेट का करीब 10 से 15% ही होना चाहिए।
साल की आखिरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में केंद्रीय बैंकों की संभावित खरीदारी और ETF निवेश में दोबारा बढ़ोतरी के चलते सोने-चांदी में फिर से शानदार रिकवरी देखने को मिल सकती है।
फिजिकल गोल्ड या डिजिटल गोल्ड: कौन सा तरीका है बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश के उद्देश्य से पारंपरिक आभूषण या फिजिकल सोना-चांदी खरीदने के बजाय डिजिटल विकल्प चुनना कहीं अधिक समझदारी भरा है।
| निवेश का माध्यम (Digital Gold/ETF) | पारंपरिक माध्यम (Physical Gold/Jewelry) |
| चोरी होने का डर नहीं, स्टोरेज की चिंता से मुक्ति | लॉकर का किराया और सुरक्षा की भारी चिंता |
| मेकिंग चार्ज नहीं लगता, जिससे सुरक्षा और बीमा का खर्च बचता है | भारी मेकिंग चार्ज और टैक्स जुड़े होते हैं |
| खरीद-बिक्री बेहद आसान और कीमतों में पूरी पारदर्शिता | बेचने पर शुद्धता की कटौती और कम दाम मिलने का जोखिम |
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का अनुमान है कि जैसे ही वैश्विक तनाव पूरी तरह शांत होगा, महंगाई नियंत्रित होगी और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू होगी, सोना-चांदी फिर से पुरानी रफ्तार पकड़ लेंगे। फिलहाल निवेशकों के लिए यही सही रणनीति है कि वे गिरावट से घबराने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर ‘बाय ऑन डिप्स’ की रणनीति अपनाएं।



