शहर की सियासत में नया गठजोड़: शिवसेना UBT के सहारे भाजपा का कब्जा
चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा की संगीता खांडेकर महापौर चुनी गईं। शिवसेना (UBT) के समर्थन से हुए इस सियासी उलटफेर ने महा विकास आघाड़ी (MVA) की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।

गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा की संगीता खांडेकर एक वोट से महापौर चुन ली गईं। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को 32-31 से हराया। इस जीत में शिवसेना (UBT) के समर्थन ने अहम भूमिका निभाई। वहीं, शिवसेना (UBT) के पार्षद प्रशांत दानव उपमहापौर निर्वाचित हुए।
सबसे बड़ी पार्टी थी कांग्रेस
66 सदस्यीय नगर निकाय में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा 23 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। शिवसेना (UBT) के पास 6 सीटें थीं। इसके अलावा
- भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) – 3 सीट
- वंचित बहुजन आघाडी (VBA) – 2 सीट
- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), बसपा और शिवसेना – 1-1 सीट
- 2 निर्दलीय
- खंडित जनादेश के बाद गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अंतिम समय में समीकरण बदल गए।
MVA और INDIA गठबंधन पर सवाल
यह घटनाक्रम महा विकास आघाड़ी (MVA) और विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। शिवसेना (UBT) इन दोनों मंचों पर कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी रही है।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए शिवसेना (UBT), AIMIM और VBA को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि यदि सहयोगी दलों ने समर्थन दिया होता तो कांग्रेस उम्मीदवार जीत सकती थी।
शिवसेना (UBT) का रुख और स्थानीय समीकरण
महापौर चुनाव से पहले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भाजपा का समर्थन न करने की बात कही थी। हालांकि परिणाम आने के बाद पार्टी के स्थानीय नेताओं ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए।
जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि कांग्रेस से पांच साल के लिए महापौर पद की मांग की गई थी, लेकिन सहमति नहीं बनने पर ‘विकास के हित में’ भाजपा से बातचीत की गई।
उपमहापौर प्रशांत दानव ने पुष्टि की कि भाजपा और शिवसेना (UBT) के बीच समझौते के तहत भाजपा को महापौर और शिवसेना (UBT) को उपमहापौर पद मिला।
भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
भाजपा खेमे में इस जीत को रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने AIMIM के समर्थन और VBA की अनुपस्थिति को परिणाम के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आंतरिक मतभेद सुलझा लिए गए हैं और पार्षद एकजुट हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इसे विपक्षी गठबंधन की विफलता करार दिया है।
चंद्रपुर नगर निगम का यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों और स्थानीय स्तर पर गठबंधन की जटिलता को उजागर करता है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की व्यापक राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।




