विदेश

परमाणु संतुलन टूटा: रूस-अमेरिका के बीच कोई नियम नहीं, दुनिया में बढ़ी बेचैनी

अमेरिका–रूस के बीच न्यू START संधि खत्म, परमाणु हथियारों की आखिरी सीमा भी टूटी। वैश्विक सुरक्षा पर मंडराया खतरा, संयुक्त राष्ट्र और विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी।

मॉस्को. दुनिया की सामरिक सुरक्षा को झकझोर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और रूस के बीच दशकों से चली आ रही न्यू START (New Strategic Arms Reduction Treaty) संधि आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई है। इसके साथ ही दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों पर हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली अंतिम बाध्यकारी व्यवस्था भी खत्म हो गई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

मेदवेदेव की चेतावनी: ‘डूम्सडे क्लॉक’ तेज हो सकती है

रूस के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने संधि के समाप्त होने को मानवता के लिए खतरनाक करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे परमाणु विनाश के खतरे का प्रतीक मानी जाने वाली डूम्सडे क्लॉक और तेज हो सकती है।

न्यू START संधि क्या थी

न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) वर्ष 2010 में अमेरिका और रूस के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता था। इस पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे।

संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई

  • दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स रखने की अनुमति
  • रणनीतिक मिसाइलों और बमवर्षकों की भी सीमा तय
  • यह समझौता वैश्विक परमाणु स्थिरता की रीढ़ माना जाता था।

शीत युद्ध से न्यू START तक की यात्रा

परमाणु हथियार नियंत्रण की कोशिशें शीत युद्ध काल से चली आ रही हैं—

  • 1970 का दशक: SALT समझौते (सीमा तय, लेकिन कटौती नहीं)
  • 1991: START-I, पहली बड़ी कटौती
  • 1993: START-II, आंशिक रूप से लागू
  • 2002: SORT (मॉस्को संधि)
  • 2010: न्यू START, सबसे प्रभावी और सत्यापन योग्य समझौता

2021 के बाद क्यों बिगड़े हालात

  • संधि को 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल के लिए बढ़ाकर 2026 तक कर दिया था।
  • हालांकि 2023 में रूस ने निरीक्षण प्रक्रिया रोक दी और यूक्रेन युद्ध में अमेरिकी भूमिका को इसकी वजह बताया।
  • आखिरकार 5 फरवरी 2026 को संधि पूरी तरह समाप्त हो गई।

रूस का ऐलान: अब किसी सीमा से बंधे नहीं

रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि न्यू START के समाप्त होने के साथ ही रूस अब किसी भी प्रकार की परमाणु हथियार सीमा या पारस्परिक दायित्व से बंधा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है।

संधि खत्म होने के संभावित असर

  • अमेरिका और रूस दोनों को मिसाइल और वारहेड्स बढ़ाने की खुली छूट
  • नई परमाणु हथियार होड़ की आशंका
  • निरीक्षण और पारदर्शिता तंत्र खत्म
  • वैश्विक अविश्वास और तनाव में वृद्धि
  • हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े पैमाने पर हथियार बढ़ाना तकनीकी रूप से समयसाध्य होगा।

परमाणु हथियारों का मौजूदा वैश्विक संतुलन

जनवरी 2025 तक अनुमानित आंकड़े—

  • रूस: 4,309 परमाणु वारहेड्स
  • अमेरिका: 3,700
  • फ्रांस: 290
  • ब्रिटेन: 225
  • चीन: लगभग 600
  • रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार रखते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। इससे चीन के परमाणु विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र और पोप की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जब अमेरिका और रूस पर कोई बाध्यकारी परमाणु सीमा नहीं होगी। वहीं पोप लियो ने दोनों देशों से भय और अविश्वास की राजनीति छोड़कर साझा वैश्विक हितों को प्राथमिकता देने की अपील की है।

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