वन विभाग की बड़ी सफलता: टाइगर रिज़र्व से 3 शिकारी पकड़े गए
उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र में एंटी-पोचिंग कार्रवाई के तहत अवैध शिकार में शामिल तीन आरोपी गिरफ्तार। हथियार और वन्यजीव अवशेष बरामद, फरार आरोपियों की तलाश जारी।

रायपुर. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संकटग्रस्त एशियाई जंगली भैंस और बाघों के संरक्षण हेतु विशेष प्रजनन केंद्र, सतत गश्त और सामुदायिक सहभागिता जैसे उपाय लागू किए गए हैं। हाल ही में पेरेग्रीन फाल्कन जैसे दुर्लभ पक्षी की उपस्थिति ने क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की पुष्टि की है।
इसी क्रम में, अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 को ध्यान में रखते हुए बढ़ाई गई निगरानी के दौरान वन विभाग एवं एंटी-पोचिंग टीम ने अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गश्त के दौरान संदिग्ध गतिविधि, मौके से एक आरोपी पकड़ा
वन विभाग के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के नागेश बीट में नियमित गश्त के दौरान छह सशस्त्र संदिग्धों की गतिविधि देखी गई। त्वरित कार्रवाई में एंटी-पोचिंग टीम ने घेराबंदी कर राजमन यादव को मौके से हिरासत में लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों गुप्ताराम, भादुराम और ओडिशा के कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में अवैध रूप से डेरा डालने की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि 16 जनवरी 2026 को गोमारझरी नाले के पास पानी पीने आए जंगली सुअरों का शिकार किया गया और मांस को टांगापानी गांव ले जाकर आपस में बांटा गया।
मुख्य आरोपी से हथियार और वन्यजीव अवशेष बरामद
टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक वरुण जैन के मार्गदर्शन और गरियाबंद पुलिस के सहयोग से 20 जनवरी 2026 को मुख्य आरोपी गुप्ताराम को भूतबेड़ा बाजार से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के घर से—
- एक भरमार बंदूक
- 3.100 किलोग्राम जंगली सुअर का मांस
- भालू का पंजा
- शिकार में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए। वहीं भादुराम के घर से वन्यजीवों को फंसाने वाले फंदे और क्लच वायर जब्त किए गए।
पेशेवर शिकारी, पहले भी दर्ज हैं मामले
रिकॉर्ड जांच में पाया गया कि आरोपी पेशेवर शिकारी हैं और मुख्य आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी वन्यजीव अपराध दर्ज हैं। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत तीनों आरोपियों को 22 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 13 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता: वन और वन्यजीव संरक्षण
उल्लेखनीय है कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उनके मार्गदर्शन में अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में एंटी-स्नेर वॉक, सतत गश्त और निगरानी को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।




