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सुप्रीम कोर्ट में ममता का दमदार प्रवेश: SIR केस की कमान खुद संभाली

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वकील के रूप में पेश हुईं, प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक और अपारदर्शी बताया।

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में चलाए जा रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री स्वयं वकील के रूप में शीर्ष अदालत में पेश हुईं और निजी तौर पर दलीलें देने की अनुमति के लिए इंटरलॉक्युटरी एप्लिकेशन भी दाखिल की।

अदालत में सुनवाई और बेंच का गठन

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, SIR से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में कुल चार याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन की याचिकाएं भी शामिल हैं।

SIR प्रक्रिया पर आपत्ति

ममता बनर्जी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक बताते हुए कहा कि यह जल्दबाजी और अपारदर्शी तरीके से की जा रही है। उनका तर्क है कि इस प्रक्रिया की आवश्यकता स्पष्ट नहीं की गई है। विशेष आपत्ति इस बात पर भी जताई गई है कि “Logical Discrepancy” श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के नामों का ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया।

पारदर्शिता और सुनवाई के अधिकार पर जोर

मुख्यमंत्री ने दलील दी कि यदि किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो उसे पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, नामों का सार्वजनिक प्रकाशन न होना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

चुनावी राज्यों में चयनात्मक कार्रवाई का आरोप

ममता बनर्जी ने यह सवाल भी उठाया कि SIR प्रक्रिया विपक्ष-शासित राज्यों में ही क्यों चल रही है, जबकि असम जैसे राज्यों में—जहां भाजपा की सरकार है—ऐसी प्रक्रिया लागू नहीं है।

चुनाव आयोग से पहले भी हुई थी बैठक

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ममता बनर्जी की भारत निर्वाचन आयोग के साथ बैठक भी हुई थी, जहां उन्होंने SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उस बैठक में उन्होंने मतदाता अधिकारों और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कड़े सवाल उठाए थे।

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