कम लागत, बड़ी खोज: पसीने से रोग पहचानने वाली टेक्नोलॉजी विकसित
IIITDM जबलपुर के छात्र ने पसीने से बीमारी पहचानने वाला स्मार्ट R एलाइनमेंट बैंड विकसित किया। नैनो तकनीक आधारित इस डिवाइस को पेटेंट मिला और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी।

जबलपुर. आज का युवा लगातार नए-नए प्रयोग कर रहा है, जिनका सीधा लाभ आम लोगों को मिल रहा है। इसी कड़ी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग के एक छात्र ने ऐसा स्मार्ट स्वेट बैंड विकसित किया है, जो पसीने में होने वाले बदलाव के आधार पर शरीर में संभावित बीमारियों की जानकारी दे सकता है। इस अभिनव डिवाइस को पेटेंट भी मिल चुका है।
पसीने से बीमारी पहचानने का अनोखा विचार
IIITDM जबलपुर में पढ़ने वाले छात्र मयूर पाटील को यह विचार तब आया, जब उन्होंने देखा कि अधिकांश बीमारियों की जांच आज भी खून के सैंपल से की जाती है। मेडिकल पुस्तकों के अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि बीमारी की स्थिति में जिस तरह रक्त में परिवर्तन होता है, उसी तरह के परिवर्तन पसीने में भी दिखाई देते हैं। इसके बाद उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि क्या पसीने के माध्यम से शरीर में होने वाले बदलावों को मापने वाली कोई प्रभावी डिवाइस मौजूद है।
कॉलेज में चर्चा, रिसर्च को मिली दिशा
मयूर पाटील ने अपने इस विचार को कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अविनाश रविराजन के साथ साझा किया। उन्होंने एक विस्तृत सिनॉप्सिस प्रस्तुत किया, जिसमें एक ऐसे स्वेट बैंड की परिकल्पना थी, जो शरीर पर पहनने के बाद पसीने के आधार पर डाटा तैयार करे और किसी भी असामान्य बदलाव की जानकारी दे सके। डॉ. रविराजन को यह विचार पसंद आया और इसके बाद एक रिसर्च टीम बनाकर काम शुरू किया गया।
नैनो तकनीक से तैयार हुआ ‘R एलाइनमेंट बैंड’
लंबे शोध और प्रयोग के बाद टीम ने घड़ी के आकार का एक स्वेट बैंड तैयार किया, जिसमें कई सेंसर लगाए गए। मयूर पाटील के अनुसार, “इस बैंड में नैनो तकनीक का उपयोग किया गया है। इसे शरीर के उस हिस्से पर लगाया जाता है, जहां से पसीने की जांच करनी होती है। लंबे प्रयासों के बाद यह डिवाइस पूरी तरह तैयार हो पाई।” इस डिवाइस का नाम R एलाइनमेंट बैंड रखा गया है।
कैसे काम करता है यह स्मार्ट बैंड
- डॉ. अविनाश रविराजन के अनुसार, इस बैंड में तीन लेयर होती हैं।
- इसमें लगे कैपेसिटर पसीने से चार्ज होते हैं
- प्राप्त डाटा को मैग्नीफाइंग डिवाइस के माध्यम से पहले से उपलब्ध प्रमाणित डाटा से मिलाया जाता है
- पसीने की pH वैल्यू और हार्मोनल बदलावों का भी विश्लेषण किया जाता है
- हालांकि इसे आर्म के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसे शरीर की अन्य ग्रंथियों के लिए भी विकसित किया जा सकता है।
बिना नुकसान पहुंचाए करेगा पूर्व चेतावनी
यह बैंड शरीर को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बिना एक प्रेडिक्शन मॉडल के रूप में काम करता है। यदि डिवाइस किसी संभावित समस्या का संकेत देती है, तो आगे मेडिकल जांच कराई जा सकती है। यह डिवाइस सामान्य लोगों के साथ-साथ एथलीट्स के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
मेडिकल परीक्षण में मिले उत्साहजनक परिणाम
बैंड तैयार होने के बाद इसका मेडिकल परीक्षण जबलपुर के कई वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ किया गया। परीक्षण से मिली रिपोर्ट्स ने रिसर्च टीम का आत्मविश्वास और बढ़ाया।
पेटेंट और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
डिवाइस को पेटेंट के लिए आवेदन किया गया, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। मयूर पाटील के अनुसार, उनकी इस खोज को देशभर के कई नामी प्रोफेसरों ने सराहा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से इस नवाचार को द्वितीय पुरस्कार मिला, वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के निदेशक ने भी इस खोज की प्रशंसा की।
स्टार्टअप की दिशा में कदम
फिलहाल इस बैंड को बनाने में करीब 30 हजार रुपये की लागत आई है, लेकिन टीम भविष्य में इसकी लागत कम करने पर काम कर रही है। मयूर पाटील की योजना इसे एक स्टार्टअप के रूप में विकसित करने की है, ताकि यह आम लोगों तक सस्ती और सुलभ कीमत पर पहुंच सके। उनका कहना है कि यह बैंड स्वस्थ व्यक्ति को भी समय रहते संभावित स्वास्थ्य समस्या के प्रति अलर्ट कर सकेगा।




