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टैरिफ डील सामने आई: सरकार ने बताई सच्चाई, किसानों की चिंता बरकरार

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सरकार का बड़ा बयान। किसानों के हितों से समझौता नहीं, प्रतिबंध-मुक्त देशों से तेल खरीदेगा भारत। 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य।

वाशिंगटन. भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सोमवार को घोषित व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। इस बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है।

सरकारी सूत्रों ने यह भी साफ किया कि भारत उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा, जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।

कृषि और डेयरी क्षेत्र रहेंगे संरक्षित

सूत्रों के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत के दौरान भारत ने अपने राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी बाजार के लिए खोलने से इनकार किया है। यही मुद्दा वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मतभेद का बड़ा कारण रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोयाबीन और डेयरी जैसे क्षेत्रों को, जिन्हें अब तक संरक्षित रखा गया है, आगे भी सुरक्षा दी जाएगी। हालांकि, इससे पहले यह अटकलें थीं कि भारत कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की पेशकश कर सकता है। भारत ने हाल में यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते में चुनिंदा कृषि उत्पादों के लिए सीमित बाजार पहुंच की अनुमति दी थी।

प्रतिबंध-मुक्त देशों से तेल खरीदेगा भारत

वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाए जाने के बावजूद भारत प्रतिदिन करीब 1.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल आयात का एक-तिहाई से अधिक है।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत प्रतिबंध-मुक्त देशों से कच्चे तेल की खरीद दर और उपलब्धता के आधार पर करता रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब वेनेजुएला पर प्रतिबंध थे, तब भारत ने वहां से तेल नहीं खरीदा, लेकिन प्रतिबंध हटने के बाद खरीद संभव है। सरकार ने दोहराया कि ऊर्जा खरीद में राष्ट्रीय हित और उपभोक्ताओं की प्राथमिकता सर्वोपरि रहेगी।

टैरिफ घटाकर 18% करने का दावा

सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को मौजूदा स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इसके बदले में भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने और वेनेजुएला से तेल लेने की बात कही गई। हालांकि, भारतीय सरकारी सूत्रों ने इन दावों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी फैसला प्रतिबंधों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

ट्रंप के अनुसार, इस व्यापार समझौते के तहत भारत ने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य के करीब लाने, साथ ही ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमति जताई है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस प्रतिबद्धता में विमान सौदे, रक्षा और अन्य निवेश शामिल हैं, जिन्हें कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। उनका कहना है कि यह समझौता भारत के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ के नए अवसर खोल सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार के ताजा आंकड़े

भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर के बीच अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि इसी अवधि में आयात 46.08 अरब डॉलर रहा।

एक अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी उत्पादों की खरीद में फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, रक्षा, पेट्रोलियम और विमानन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे और यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चलेगी।

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