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राहुल गांधी विवाद: आखिर क्या है लोकसभा नियम 349, जिसे लेकर मचा सियासी बवाल

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी के बयान पर हंगामा हुआ। स्पीकर ने नियम 349 का हवाला देते हुए सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की।

नई दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक संस्मरण के मसौदे का उल्लेख किए जाने पर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध जताया।

रक्षा मंत्री और गृह मंत्री ने जताई आपत्ति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने संस्मरण का सदन में हवाला दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद सत्ता पक्ष और कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

दो बार स्थगित करनी पड़ी लोकसभा

सदन में लगातार हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले अपराह्न 2:09 बजे सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित की। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे का उल्लेख किया, जिससे हंगामा दोबारा शुरू हो गया। इसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सदन में मौजूद थे।

स्पीकर ने नियम 349 का दिलाया हवाला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा नियम संख्या 349 का हवाला देते हुए राहुल गांधी से कई बार कहा कि वे किसी पुस्तक, पत्रिका या प्रकाशित सामग्री को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते। इसके बावजूद राहुल गांधी ने चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का मुद्दा उठाने की कोशिश की और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के चरित्र के बारे में भी उल्लेख किया है। इस पर राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

क्या है लोकसभा का नियम 349?

लोकसभा की नियम पुस्तिका का नियम 349 सदन में सांसदों के आचरण और मर्यादा से संबंधित है। इसके तहत—

  • कोई भी सदस्य सदन में अखबार, पत्रिका या पुस्तक के अंश पढ़ नहीं सकता।
  • सदन के भीतर नारेबाजी, प्रदर्शन, तख्तियां, पोस्टर, झंडे या प्रतीक चिह्न दिखाना वर्जित है।
  • किसी अन्य सदस्य के बोलते समय बाधा डालना नियम उल्लंघन माना जाता है।

स्पीकर के निर्देश मानना अनिवार्य

नियम 349 के अनुसार, सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करना बाध्यकारी है। बिना अनुमति किसी विषय को उठाना, जोर-जोर से बोलना या कार्यवाही में बाधा डालना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।

तेजस्वी सूर्या के बयान से जुड़ा विवाद

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के बयान का उल्लेख करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए गए हैं, इसलिए वे एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का अंश पढ़ना चाहते हैं।
इस पर राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जिस पुस्तक का हवाला दिया जा रहा है, वह प्रकाशित भी हुई है या नहीं।

बार-बार स्थगन से बाधित हुई कार्यवाही

गृह मंत्री अमित शाह ने भी व्यवस्था बनाए रखने की बात कही और नियमों के पालन पर जोर दिया। जब राहुल गांधी अपने रुख पर अड़े रहे, तो स्पीकर ओम बिरला ने इसे आसन की अवमानना करार दिया। लगातार गतिरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले 3 बजे और फिर 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

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