घर के हालात बेकाबू, बाहर आरोपों की बौछार—बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का भारत-विरोधी रुख
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों का बड़ा हमला, कई शहरों में एक साथ अटैक। पाकिस्तान के अलग-अलग दावे, ISPR ने भारत पर लगाया आरोप, पंजाब-बलूचिस्तान के रास्ते बंद।

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इन हमलों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि उसके 18 सैनिकों की मौत हुई है और जवाबी कार्रवाई में 92 बलूच विद्रोही ढेर किए गए हैं। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान ने आंतरिक असंतोष और सुरक्षा विफलताओं की जिम्मेदारी लेने के बजाय एक बार फिर भारत पर आरोप लगाने की कोशिश की है।
CPEC, ग्वादर और स्थानीय नाराज़गी
बलूचिस्तान लंबे समय से अशांति की चपेट में है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बावजूद स्थानीय आबादी के हालात नहीं बदले हैं। इसी असंतोष के चलते बलूच विद्रोही संगठन पाकिस्तानी सेना, प्रशासन, पंजाबी मूल के लोगों और कई बार चीनी नागरिकों को भी निशाना बनाते रहे हैं।
ISPR का भारत पर आरोप, संगठन के अस्तित्व पर सवाल
पाकिस्तानी सेना की प्रचार इकाई ISPR ने इन हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। ISPR ने दावा किया कि ये हमले भारत समर्थित ‘फितना-अल-हिन्दुस्तान’ नाम के संगठन ने किए हैं।
हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस नाम के किसी संगठन के अस्तित्व का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, जिससे पाकिस्तानी दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक साथ कई शहरों में हमले
पाकिस्तानी दावों के अनुसार, हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए। इस तरह एक साथ कई इलाकों को निशाना बनाए जाने से हमलों की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा रहा है।
‘क्लियरेंस ऑपरेशन’ का दावा
पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें 92 विद्रोहियों को मार गिराया गया। हालांकि, इस दौरान 18 नागरिकों और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत की भी पुष्टि की गई है। बलूचिस्तान के साथ-साथ खैबर पख्तूनख्वा में भी सेना और प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराज़गी बनी हुई है।
खौफ इतना कि रास्ते ही बंद करने पड़े
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पंजाब से बलूचिस्तान जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। उस्मान खालिद, डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर, ने बताया कि— फोर्ट मुनरो हाईवे, मूसा खेल रोड को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके अलावा सीमाओं पर चल रहे ट्रैफिक को भी रोक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है, ताकि ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे। पाकिस्तान में पहले भी बलूच विद्रोहियों द्वारा पंजाबी मूल के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
आंतरिक संकट और बढ़ती चुनौतियां
विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान में लगातार हो रहे हमले पाकिस्तान के लिए गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती बन चुके हैं। स्थानीय असंतोष, आर्थिक असमानता और राजनीतिक उपेक्षा के मुद्दों को हल किए बिना हालात में सुधार की संभावना कम ही नजर आ रही है।




