घर की किस्मत बदलता है मुख्य द्वार, सही दिशा से आती है खुशहाली
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए? जानिए उत्तर, पूर्व और ईशान कोण की महत्ता और मुख्य द्वार से जुड़े जरूरी वास्तु नियम।

वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि वास्तु नियमों का पालन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वास्तु की दृष्टि से घर का मुख्य द्वार सबसे अहम हिस्सा होता है, क्योंकि यही मार्ग घर में सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का माध्यम बनता है। यदि मुख्य द्वार शुभ दिशा में हो, तो घर में खुशहाली और मानसिक शांति बनी रहती है।
मुख्य द्वार के लिए कौन-सी दिशा है शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार निम्न दिशाओं में होना विशेष रूप से शुभ माना जाता है—
उत्तर दिशा: उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से घर में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि बनी रहती है।
पूर्व दिशा: पूर्व दिशा सूर्य देव से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से मान-सम्मान, यश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): यदि घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में हो, तो घर में शांति, सुख और आध्यात्मिक ऊर्जा का वास रहता है।
मुख्य द्वार से जुड़ी जरूरी वास्तु सावधानियां
मुख्य द्वार की दिशा के साथ-साथ इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है—
- मुख्य द्वार घर के अंदर की ओर खुलना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
- मुख्य द्वार घर के अन्य दरवाजों की तुलना में आकार में बड़ा होना चाहिए।
- मुख्य द्वार पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। गंदगी होने से सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है।
- द्वार पर स्वस्तिक या शुभ चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है।
- मुख्य द्वार के पास पेड़-पौधे या गमले लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
- मुख्य द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए, अंधेरा नकारात्मकता को बढ़ाता है।
- वास्तु शास्त्र के इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि का वास बना रहता है।




