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35 फीट का चौड़ल, थिरकती महिलाएं: कुचाई के टुसू मेले में रंगों की बौछार

रांची/सरायकेला-खरसावां. झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के सीमावर्ती सेकरेडीह और रांची जिले के तमाड़ प्रखंड स्थित आराहंगा गांव के बीच मैदान में बसंती पंचमी के अवसर पर परंपरागत टुसू मेला आयोजित किया गया। मेले का उद्घाटन स्थानीय विधायक दशरथ गागराई ने किया।

मेले में कुचाई और तमाड़ के विभिन्न गांवों से महिलाएं पारंपरिक चौड़ल लेकर पहुंचीं और लोकनृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक रंग जमाया। हजारों लोग टुसू पर्व के रंग में सराबोर नजर आए।

35 फीट ऊंचे चौड़ल को प्रथम पुरस्कार

चौड़ल प्रतियोगिता में तमाड़ के पियाकुली गांव का 35 फीट ऊंचा चौड़ल आकर्षण का केंद्र रहा। विधायक दशरथ गागराई ने टीम को प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹10,000 प्रदान कर सम्मानित किया। चौड़ल समिति पियाकुली की महिलाओं ने बताया कि हर वर्ष महीनों की मेहनत से चौड़ल तैयार किया जाता है, ताकि स्थानीय संस्कृति और परंपरा का संरक्षण हो सके।

अन्य पुरस्कार विजेता

  • द्वितीय पुरस्कार: कुचाई के बुरुबांडी (₹7,000)
  • तृतीय पुरस्कार: चांडिल (₹5,000)
  • चतुर्थ पुरस्कार: कुचाई के कुदाडीह (₹2,000)

छोपोल-छापोल नृत्य ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान डीजे डांस ग्रुप के कलाकारों ने छोपोल-छापोल आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति दी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

‘टुसू पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक’

पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि टुसू पर्व क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इससे सामाजिक भाईचारा मजबूत होता है और गांवों की कला, संस्कृति व खेल प्रतिभाओं को मंच मिलता है। उन्होंने युवाओं से परंपराओं को सशक्त बनाने में आगे आने की अपील की।

जनप्रतिनिधि और आयोजक रहे मौजूद

मेले में तमाड़ के जिप सदस्य भवानी मुंडा, कुचाई के एमएलए प्रतिनिधि धर्मेंद्र मुंडा, राम सोय, राहुल सोय, चंद्र मोहन मुंडा, शंभू मुंडा, कारु मुंडा सहित आयोजन समिति के अध्यक्ष बहादुर मुंडा और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। विधायक का पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया गया।

दो जिलों की साझा पहल

सेकरेडीह (कुचाई) और आराहंगा (तमाड़) गांवों के लोग हर वर्ष बसंती पंचमी पर संयुक्त रूप से टुसू मेला आयोजित करते हैं। यह मेला न केवल लोक संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का माध्यम है, बल्कि दोनों जिलों के लोगों के बीच सामाजिक सद्भाव को भी सुदृढ़ करता है।

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