घर की नकारात्मकता का संकेत? बाथरूम में खाली बाल्टी और तनाव का वास्तु कनेक्शन
वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम में खाली बाल्टी रखना अशुभ माना जाता है। जानें इसका आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति पर क्या असर पड़ता है।

अक्सर लोग घर की सजावट और मुख्य कमरों के वास्तु पर विशेष ध्यान देते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी महत्वपूर्ण जगह को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम का सीधा संबंध व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और मानसिक संतुलन से होता है। ऐसी ही एक आम लेकिन गंभीर भूल है—बाथरूम में खाली बाल्टी छोड़ देना।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी सी आदत घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती है और आर्थिक समस्याओं का कारण बन सकती है। कई बार लोग अनजाने में रात के समय बाल्टी को खाली छोड़ देते हैं, जिसे वास्तु में दोष माना गया है।
खाली बाल्टी क्यों मानी जाती है अशुभ
वास्तु शास्त्र में जल को ‘सम्पन्नता’ और ‘प्रवाह’ का प्रतीक माना गया है। बाथरूम में खाली बाल्टी रखना खालीपन, अभाव और रुकी हुई ऊर्जा का संकेत देता है। मान्यता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और आर्थिक तंगी का संकेत मिलता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि रात में खाली बाल्टी छोड़ने से घर में तनाव और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से जल तत्व का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, और खाली पात्र मानसिक अशांति को बढ़ावा दे सकते हैं।
बाल्टी का रंग और स्थिति भी है अहम
वास्तु में केवल बाल्टी का भरा होना ही नहीं, बल्कि उसका रंग और स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नीले रंग का महत्व: नीले रंग की बाल्टी को वास्तु में शुभ माना गया है। यह जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है और मान्यता है कि इससे नकारात्मक ग्रह प्रभावों में कमी आती है।
सफाई और स्थिति: बाल्टी टूटी हुई, बहुत पुरानी या गंदी नहीं होनी चाहिए। ऐसी बाल्टी को वास्तु में दरिद्रता और अव्यवस्था का कारण माना गया है।
छोटी आदत, बड़ा प्रभाव
वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाथरूम में बाल्टी का उपयोग किया जाता है, तो उसे हमेशा साफ और यथासंभव पानी से भरा रखना चाहिए। यह आदत न केवल वास्तु दोष को दूर करती है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होती है।




