पतंगों से करोड़ों की कमाई! जयपुर में मकर संक्रांति पर ₹18 करोड़ का बिज़नेस
मकर संक्रांति से पहले जयपुर के पतंग बाजार में जबरदस्त रौनक। 18 करोड़ के कारोबार की उम्मीद, डेढ़ करोड़ से अधिक पतंगों की बिक्री, कारीगरों की बढ़ी कमाई।

जयपुर. मकर संक्रांति को लेकर शहर के बाजारों में पतंगों की खरीद-फरोख्त चरम पर है। देर रात तक पतंग और मांझा खरीदने वालों की भीड़ उमड़ रही है। व्यापारियों के अनुसार इस बार डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की पतंगों की बिक्री की उम्मीद है, वहीं मांझा-डोर और चरखी की भी रिकॉर्ड मांग बनी हुई है।
300 से अधिक दुकानों में सुबह से रात तक रौनक
पतंग मार्केट में कुल कारोबार 18 करोड़ रुपए से अधिक रहने का अनुमान है। हांडीपुरा (जगन्नाथशाह का रास्ता), किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार और हल्दियों का रास्ता—इन इलाकों में 300 से अधिक दुकानें सजी हैं। मकर संक्रांति नजदीक आते ही ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी है; पिछले तीन दिनों में खरीदारों की आमद एक साथ बढ़ी है।
परंपरागत से फैंसी तक, हर डिज़ाइन की मांग
बाजार में छोटी पतंगों से लेकर 4 फीट तक की पतंगें उपलब्ध हैं। परंपरागत चांददारा, गिलासदारा डिज़ाइन की अद्धा, मझौली और पोणी पतंगें खूब बिक रही हैं। इसके साथ ही पन्नी की लटकन, झालर जैसी फैंसी पतंगें भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं।
बीकानेर से फर्रूखाबाद तक के व्यापारी
स्थानीय कारोबारियों के साथ बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, फर्रूखाबाद और बीकानेर, सीकर जैसे शहरों से व्यापारी यहां दुकानें लगाए हुए हैं। बीकानेर से आए व्यापारी असलम खान बताते हैं कि वे दो माह पहले जयपुर पहुंचे थे—दिसंबर तक होलसेल, अब रिटेल बिक्री हो रही है।
छुट्टियों ने बढ़ाई पतंगबाजी की रफ्तार
स्कूलों की छुट्टियां और शनिवार-रविवार का अवकाश होने से संक्रांति से पहले ही शहर की छतों पर पतंगें उड़ने लगी हैं। बच्चों और युवाओं का उत्साह बढ़ा है, जिसका सीधा असर बाजार की रौनक पर दिख रहा है।
कळपने के सामान और दान-पुण्य की तैयारी
मकर संक्रांति पर 14-14 वस्तुएं कळपने की परंपरा के चलते कळपने के सामान की दुकानों पर भीड़ है। दुकानदारों ने 14-14 वस्तुओं के पैकेट तैयार किए हैं, जिनकी कीमत 30 रुपए से 2,000 रुपए तक है। प्लास्टिक आयटम, ऊनी कपड़े, सुहाग और शृंगार की वस्तुएं अधिक बिक रही हैं।
विशिंग लैम्प और पटाखों की बिक्री में उछाल
संक्रांति के अवसर पर विशिंग लैम्प और पटाखों की बिक्री भी तेज है। व्यापारियों का अनुमान है कि संक्रांति तक एक करोड़ रुपए से अधिक के विशिंग लैम्प बिक सकते हैं।
कारीगरों की कमाई में बढ़ोतरी
पतंग और मांझा तैयार करने वाले कारीगर इन दिनों 600 से 1,500 रुपए रोज कमा रहे हैं। एक पतंग 10–15 कारीगरों के हाथों से गुजरकर तैयार होती है, जिसमें महिलाएं भी सहयोग करती हैं। एक कारीगर प्रतिदिन करीब 12 रील मांझा तैयार कर लेता है।
इन बाजारों में सबसे ज्यादा भीड़
- जगन्नाथशाह का रास्ता (हांडीपुरा)
- किशनपोल बाजार
- चांदपोल बाजार
- हल्दियों का रास्ता
एक नजर…
- शहर में 1,500+ पतंग दुकानें, 250+ होलसेल दुकानें
- एक पतंग की कीमत: ₹2 से ₹150
- 3 रील मांझा चरखी: ₹250 से ₹2,000
- पिछले साल की तुलना में पतंगें 20% महंगी
(बड़ी दुकानों पर प्रति दुकान 1–1.5 लाख तक पतंगों की बिक्री)
“इस बार जयपुर में डेढ़ करोड़ से अधिक पतंगें बिकेंगी। पतंग और मांझे का कुल कारोबार 18 करोड़ रुपए से ऊपर जाने की उम्मीद है। पिछले साल की तुलना में ग्राहकी करीब 30% बढ़ी है।”
— संजय गोयल, अध्यक्ष, जयपुर पतंग उद्योग




