जयपुर की सड़कों पर उतरे रोबोटिक डॉग्स, देखकर लोग रह गए दंग!
सेना दिवस 2026 की जयपुर परेड में भारतीय सेना के रोबोटिक डॉग्स (MULE) ने सबका ध्यान खींचा। जानिए ‘संजय’ नाम के इन AI रोबोट्स की खासियतें।

जयपुर. 15 जनवरी को होने वाली सेना दिवस परेड 2026 की मुख्य परेड इस बार जयपुर में आयोजित होगी। परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान शहर की सड़कों पर फौजी बूटों की धमक के साथ एक अलग ही आवाज़ गूंज रही है—लोहे के पैरों की खनक। वजह है भारतीय सेना की अत्याधुनिक तकनीक रोबोटिक डॉग्स, जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं।
क्या हैं रोबोटिक डॉग्स?
भारतीय सेना ने अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी रोबोटिक डॉग्स को जयपुर की परेड रिहर्सल में उतारा है। इन्हें तकनीकी भाषा में MULE (Multi-Utility Legged Equipment) कहा जाता है। सवाल उठता है—क्या ये महज़ खिलौने हैं या जंग का पासा पलटने वाले आधुनिक साधन? जवाब है: ये भविष्य के रणक्षेत्र की झलक हैं।
रोबोटिक डॉग्स क्यों कहलाए ‘म्यूल’ (खच्चर)?
सेना में सामान ढोने के लिए परंपरागत रूप से खच्चर का इस्तेमाल होता रहा है। अंग्रेज़ी में खच्चर को Mule कहा जाता है। इसी भूमिका को आधुनिक तकनीक से निभाने के कारण इन रोबोटिक डॉग्स का नाम MULE रखा गया है। चीन और अमेरिका जैसे देशों में भी ऐसे उपकरणों का उपयोग होता है।
सेना ने रखा नाम ‘संजय’
- सेना ने इन रोबोटिक डॉग्स को प्यार से ‘संजय’ नाम दिया है।
- वजन: करीब 51 किलोग्राम
- शक्ति: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- बैटरी: एक चार्ज में 20 घंटे तक संचालन
- टेक्नोलॉजी: NVIDIA ग्राफिक्स कार्ड्स
- संचालन: रिमोट और ऑटोमैटिक दोनों मोड
- इनका विकास दिल्ली की AeroArc कंपनी ने किया है।
रोबोटिक डॉग्स की जबरदस्त खासियतें
- -40°C से 55°C तक के तापमान में काम करने में सक्षम
- 3 मीटर/सेकंड की रफ्तार
- पहाड़, खाइयां, संकरी सीढ़ियां—हर चुनौती आसान
- थर्मल कैमरा और LiDAR सेंसर से रात में भी दुश्मन की पहचान
- 12–15 किलो तक बारूद, राशन या दवाइयां ढोने की क्षमता
Wi-Fi / LTE से 10 किमी दूर बैठकर नियंत्रण
सबसे चौंकाने वाली बात—इन पर हल्के हथियार (Small Arms) भी फिट किए जा सकते हैं, जिससे जोखिम भरे इलाकों में जवानों की जान सुरक्षित रहती है।
आत्मनिर्भर भारत की झलक
आतंकी ठिकानों, संकरी गलियों और दुर्गम इलाकों में अब जवानों की जगह ये रोबोटिक डॉग्स मोर्चा संभाल सकते हैं। फिलहाल जयपुर के जगतपुरा और महल रोड पर रिहर्सल के दौरान ये लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं—और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त तस्वीर पेश कर रहे हैं।
15 जनवरी को परेड में जरूर देखें
15 जनवरी को सेना दिवस परेड में जब ये आधुनिक योद्धा कदमताल करेंगे, तो तालियों से उनका स्वागत जरूर करें। यह दिखाता है कि भारतीय सेना अब जज़्बे के साथ-साथ दुनिया की बेहतरीन तकनीक से भी लैस है। दिल्ली से बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करने वाला जयपुर, बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे के बाद चौथा शहर है।




