सुरक्षा रणनीति का असर: दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
दंतेवाड़ा में नक्सलवाद को बड़ा झटका: 63 इनामी नक्सलियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण किया। ‘लोन वर्राटू’ और ‘पूना मारगेम’ अभियान से मिली ऐतिहासिक सफलता।

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई को बड़ी सफलता मिली है। दंतेवाड़ा जिले में राज्य सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ‘पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’ और ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान के तहत कुल 63 इनामी नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। इन नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। खास बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में 16 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
यह सामूहिक सरेंडर न सिर्फ संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर नक्सली नेटवर्क के लिए भी गहरा झटका माना जा रहा है। दंतेवाड़ा पुलिस और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से यह स्पष्ट है कि सरकार की पुनर्वास आधारित नीति अब जमीन पर असर दिखा रही है।
बस्तर से ओडिशा सीमा तक सक्रिय थे नक्सली
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ क्षेत्र और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे। इनमें से कई नक्सली संगठन में अहम पदों पर रह चुके हैं और लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों, जंगलों में बढ़ती घेराबंदी और सरकार की पुनर्वास नीति ने नक्सलियों पर जबरदस्त मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके चलते हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति तेज हुई है।
प्रमुख नक्सली नेताओं का आत्मसमर्पण
इस सामूहिक सरेंडर में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती भी शामिल है, जिसने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया। इन नक्सलियों पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था, जो संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इसे नक्सली संगठन की कमर तोड़ने वाला कदम माना जा रहा है।
अभियान की व्यापकता
यह आत्मसमर्पण केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। इसमें राज्य के बाहर सक्रिय नक्सली भी शामिल हैं। यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बल नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल रहा है, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास का रास्ता खुल रहा है।
‘पूना मारगेम’ और ‘लोन वर्राटू’ की अहम भूमिका
इस बड़े सरेंडर के पीछे ‘पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’ और ‘लोन वर्राटू’ अभियानों की निर्णायक भूमिका मानी जा रही है। इन अभियानों का उद्देश्य नक्सलियों को केवल हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और पुनर्वास का भरोसा देना है। सरकार का फोकस विश्वास, संवाद और पुनर्वास पर रहा है।
एसपी गौरव राय का बयान
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने इसे पुलिस और राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नक्सली विचारधारा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि विकास और विश्वास की नीति सफल हो रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की सभी पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा जाएगा।




